पर्थ। रविवार को हर तरफ सिर्फ भारतीय क्रिकेट टीम और श्रीलंका पर इसे मिली जीत की चर्चा थी। लेकिन इससे हजारों किलोमीटर दूर ऑस्ट्रेलिया में भारतीय हॉकी टीम एक नया इतिहास रच रही थी। वर्ल्ड चैंपियन ऑस्ट्रेलिया को 3-1 से हराकर भारतीय हॉकी ने देश में हॉकी के दिवानों को जश्न का नया मौका दे डाला।
हर टीम का सामना करने की ताकत
भारत की इस जीत पर भारतीय हॉकी टीम के पूर्व कोच माइकल नोब्स ने कहा है कि टीम अब हर 'रांग' को 'राइट' कर रही है। साथ ही इस टीम में पूरी क्षमता है कि वह दुनिया की किसी भी ताकतवर टीम का सामना कर सके।
अक्टूबर में इंचिायोन में संपन्न हुए एशियन गेम्स में पाकिस्तान को हराकर गोल्ड मेडल जीतने वाली भारतीय हॉकी टीम ने एक बार फिर से देश का तिरंगा ऑस्ट्रेलिया की फिजांओं में लहरा डाला। भारत ने ऑस्ट्रेलिया में शुरू हुई हॉकी सीरिज का पहला मैच गंवा दिया था। उसके बाद टीम ने एक भी मैच नहीं हारा।
भारत ने पर्थ हॉकी स्टेडियम में रविवार को खेले गए श्रृंखला के चौथे और आखिरी मैच में मेजबान तथा विश्व चैम्पियन आस्ट्रेलिया को 3-1 से हरा दिया। इसके साथ ही भारत ने श्रृंखला भी 3-1 से अपने नाम कर ली। भारत की ओर से पहला गोल 13वें मिनट में आकाशदीप सिंह ने पेनाल्टी कॉर्नर के जरिए किया।
भारत ने दिखाया आक्रामक खेल
बढ़त मिलने के साथ ही उत्साहित भारतीय टीम ने और भी आक्रामक रुख अपनाया। इस बीच दूसरे क्वार्टर में दोनों टीमों को एक-एक पेनाल्टी कॉर्नर और मिला लेकिन दोनों ही मौकों पर कोई गोल नहीं हो सका।
तीसरे हाफ में आस्ट्रेलिया ने मजबूत वापसी की और इस बार थॉमस क्रेग ने पेनाल्टी कॉर्नर पर मौका नहीं चूकते हुए 36वें मिनट में आस्ट्रेलिया की ओर से पहला गोल दाग दिया। तीसरे क्वार्टर की समाप्ति तक स्कोर 1-1 से बराबर रहा।
भारत ने हालांकि चौथे क्वार्टर में आश्चर्यजनक रूप से वापसी की। मैच के 50वें मिनट में आकाशदीप ने शानदार फील्ड गोल करते हुए भारतीय टीम को बढ़त दिलाई। आस्ट्रेलिया अभी इस गोल से संभला भी नहीं था कि केवल तीन मिनट बाद एस.के. उथप्पा ने एक और गोल कर भारत की बढ़त 3-1 कर दी।
कप्तान सरदार सिंह का 200वां मैच
आखिरी मिनटों में हालांकि आस्ट्रेलियाई खिलाड़ियों ने बराबरी करने की कई कोशिशें की लेकिन वे भारतीय गोलकीपर पी.आर श्रीजेश से पार नहीं पा सके। यह मैच भारतीय कप्तान सरदार सिंह के लिए 200वां अंतराष्ट्रीय मैच भी रहा।