तांगे वाले की लड़की, जिसने हॉकी टीम को ओलंपिक में पहुंचाकर रोशन किया पिता का नाम

Inspirational story of Rani Rampal, who made India proud by bringing hockey team to tokyo Olympics

नई दिल्ली: आप किसी भी तर्क के पक्षधर हों, लेकिन जब भी भारत के महानतम हॉकी खिलाड़ियों के बारे में चर्चा होगी उसमें रानी रामपाल के नाम के बिना कोई सूची नहीं बनाई जा सकती है। रानी ने जिस तरह से हॉकी में टीम इंडिया का नेतृत्व किया है उसके दम पर महिला हॉकी टीम अब ओलंपिक गेम्स खेलने के लिए टोक्यो का टिकट कटा चुकी है। हर चरण में, रानी ने खुद को उठाया है और खुद ही उदाहरण सेट करके अपने साथियों को दिखाया कि नए दिन पर एक नया तरीका कैसे खोजा जाए। रानी के कौशल को हमेशा सराहा गया, यह रानी का शानदार नेतृत्व है जो उन्हें अलग बनाता है।

पिता चलाते हैं घोड़ा-तांगा

पिता चलाते हैं घोड़ा-तांगा

कम ही लोग यह जानते हैं कि उनके पिता एक घोड़ागाड़ी वाले थे जिन्होंने इसी से अपना जीवन-यापन किया। बाद में उनकी बेटी ने भारतीय महिला हॉकी टीम की कप्तान बनकर अपने पिता का सिर ऊंचा कर दिया। रानी रामपाल हरियाणा के शाहबाद मारकंडा की रहने वाली हैं। वे भारतीय महिला टीम की कप्तान हैं और उनकी ही अगुवाई में टीम अब ओलंपिक गेम्स 2020 खेलने टोक्यो जाएगी। ओडिशा के कलिंगा स्टेडियम में टोक्यो ओलंपिक हॉकी क्वॉलिफायर के दूसरे मुकाबले में भारतीय महिला टीम को अमेरिका के हाथों 4-1 से हार का सामना करना पड़ा, लेकिन भारतीय कप्तान रानी रामपाल ने चौथे क्वार्टर में किये गए निर्णायक गोल की मदद से भारतीय महिला हॉकी टीम ने अगले साल होने वाले टोक्यो ओलंपिक के लिए क्वालीफाई कर लिया।

तमाम मुश्किलों से भरा बचपन-

तमाम मुश्किलों से भरा बचपन-

रानी रामपाल हरियाणा के शाहबाद से हैं, यह जगह हॉकी के लिए ठीक वैसी ही मशहूर हैं जैसे की पंजाब की संसारपुर। यह हॉकी का बना हुआ माहौल ही था जिसने रानी का ध्यान इस स्पोर्ट्स की ओर खींचा। इसी जगह से भारतीय महिला टीम की पूर्व कप्तान ऋतु रानी, रजनी बाला, नवनीत कौर, ड्रैग फ्लिकर संदीप सिंह और संदीप कौर जैसे मशहूर हॉकी खिलाड़ियों का उत्थान हुआ। रानी का भारतीय टीम में चयन महज 14 साल की उम्र में ही हो गया था। हालांकि रानी रामपाल का सफर बिल्कुल भी आसान नहीं रहा। रानी रामपाल की जिंदगी बचपन अन्य कई स्टार खिलाड़ियों जैसी नहीं थी। उन्होंने मुश्किलों का काफी सामना किया। घर में आर्थिक दुश्वारियां काफी थीं। पिता घोड़ा-तांगा चलाते थे।

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पिता के नाम पर ही रखा है रानी ने पूरा नाम

पिता के नाम पर ही रखा है रानी ने पूरा नाम

उनके पिता के पास उनको हॉकी दिलाने तक के पैसे नहीं थे। इसके बावजूद उनके पिता ने बेटी के जज्बे को कम नहीं होने दिया और रानी की प्रतिभा को निखारने के लिए उनको गांव की ही एक अकादमी में दाखिला दिला दिया। पिता के तांगे और भाई के बढ़ई के काम के बीच रानी की प्रैक्टिस चलती रही। इन सब विषम परिस्थितियों के बावजूद रानी का इस मुकाम पर पहुंचाना किसी भी खेल हस्ती की एक प्रेरणादायक कहानी का चरम बन जाता है। रानी आज पूरी दुनिया में अपना नाम रोशन कर रही है, देश का नाम चमका रही है। रानी ने बचपन भले ही कितनी ही मुश्किलों में गुजारा हो, वह अपने पिता को जज्बे को आज सलाम करती हैं। उन्होंने अपने पिता का नाम अपने नाम के साथ जोड़ा हुआ है। रानी रामपाल को अर्जुन व भीम अवार्ड से नवाजा जा चुका है।

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Story first published: Wednesday, November 6, 2019, 15:56 [IST]
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