पिच पर उड़ते गेंदों के फोर और सिक्स,
झूम उठा दिल फिर पता चला ये तो था फिक्स।
अब ख़ुशी मनाये या अफ़सोस,
हर फीलिंग पे है एक रिस्क।
शुक्र है हमारी हॉकी इतनी फेमस नहीं,
हर गली हर मोड़ हर ज़बान पर नही,
मगर जितनी है हमारी अपनी है और इसमें कुछ भी फिक्स नहीं।
लेखक परिचय- प्रियंका श्रीवास्तव, गाजियाबाद की रहने वाली कुशल गृहणी हैं।
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