लीग मैचों में भी भारत को नीदरलैंड से हार का सामना करना पड़ा था. फ़ाइनल में लगा कि भारतीय टीम ने पुरानी ग़लतियाँ नहीं सुधारी.
शुरुआती खेल में दोनों टीमें कोई गोल नहीं कर पाईं. वहीं मध्यांतर के बाद भारत ने बढ़त बनाई लेकिन दबाव बनाए रखने में विफलता हाथ लगी.
नीदरलैंड के लिए जेरोन हॉट्सबर्गर ने दो गोल किए जबकि भारत की ओर कप्तान संदीप सिंह ने पेनल्टी स्ट्रोक के ज़रिए एकमात्र गोल किया.
मध्यांतर के बाद भारत ने संदीप के गोल की मदद से 1-0 की बढ़त हासिल कर ली थी लेकिन जल्द ही नीदरलैंड की टीम ने बराबरी का गोल कर दिया.
भारत अंतिम क्षणों में फिर पिछड़ गया
मैच के अंतिम क्षणों में भारतीय टीम के प्रदर्शन में गिरावट देखी गई जबकि उसे गोल दागने के कई मौके मिले.
इसी का फायदा उठाकर नीदरलैंड ने पेनल्टी कॉर्नर हासिल किया और उसे गोल में बदलकर 2-1 की बढ़त बना ली.
भारत ने नीदरलैंड के ख़िलाफ़ आख़िरी बार 1996 में जीत दर्ज की थी.
पूरे टूर्नामेंट में नीदरलैंड एक भी मैच नहीं हारा. तुलनात्मक रुप में भारत ने भी बढ़िया प्रदर्शन किया और फाइनल से पूर्व सिर्फ़ एक मैच हारा वो भी चैंपियन नीदरलैंड से.
फ़ाइनल में भारत को पांच पेनल्टी कॉर्नर मिले जबकि नीदरलैंड को तीन पेनल्टी कॉर्नर मिले.
तीसरे स्थान के लिए हुए मुक़ाबले में न्यूज़ीलैंड ने विश्व और ओलंपिक चैंपियन जर्मनी के ख़िलाफ़ अप्रत्याशित जीत हासिल की.