फ्रांसीसी कार कंपनी रेनॉल्ट की फॉर्मूला-1 टीम को वर्ष 2008 की कार दौड़ प्रतियोगिता में जोड़-तोड़ करने के आरोपों के बावजूद प्रतियोगिता में भाग लेने से स्थाई तौर पर अयोग्य नहीं ठहराया गया है.
रेनॉल्ट की फ़ॉर्मूला-1 टीम के पूर्व चालक नेल्सन पिकेट ने दावा किया था कि उसे सिंगापुर में हुई ग्राँ प्री दौड़ के दौरान अपनी कार को जानबूझकर दीवार से टकरा देने की हिदायत मिली थी.
इन दावों के बावजूद फ़ॉर्मूला-1 की प्रशासकीय संस्था एफ़आईए ने पेरिस में सोमवार को एक बैठक की और उसमें रेनॉल्ट की टीम पर दो वर्ष का प्रतिबंध फिलहाल टाल दिया है यानी यह प्रतिबंध अभी लागू नहीं होगा.
इस सुनवाई में निष्कर्ष दिया गया कि रेनॉल्ट कंपनी का यह कारनामा असाधारण रूप से गंभीर था.
एफ़आई ने एक वक्तव्य जारी करके कहा है कि टीम ने अपने ड्राइवर नेल्सन पिकेट जूनियर को जानबूझकर दीवार में टक्कर मारने की जो हिदायत दी थी, इससे न सिर्फ़ प्रतियोगिता की प्रतिष्ठा पर बट्टा लगा है बल्कि इससे अनेक दर्शकों, कर्मचारियों अन्य प्रतियोगियों और ख़ुद नेल्सन पिकेट के जीवन को भी ख़तरा पैदा हो गया था.
सुनवाई दल ने रेनॉल्ट की यह दलील स्वीकार कर ली कि पिछले वर्ष की फ़ॉर्मूला-1 टीम के मुखिया फ्लिवेयो ब्रायटोर और एक अन्य अधिकारी को अलग कर दिया गया था इसलिए कंपनी पर जुर्माना नहीं लगाया जाए.
इसके अलावा रेनॉल्ट कंपनी ने इस जाँच में भी एफ़आईए को सहयोग दिया. लेकिन सुनवाई के बाद फ़ैसला दिया गया है कि अगर कंपनी की तरफ़ से अगले दो वर्ष में कोई भी नियम तोड़ा गया तो उसे फॉर्मूला-1 दौड़ प्रतियोगिता से प्रतिबंधित कर दिया जाएगा.
रेनॉल्ट कंपनी पर भारी जुर्माना लगने की संभावना जताई गई थी लेकिन चूँकि कंपनी ने इस ग़लती को स्वीकार करते हुए भूल सुधार के लिए अनेक क़दम उठाए जिसकी वजह से प्रतिबंध नहीं लगाया गया है.
फ्लेवियो ब्रायटोर ने रेनॉल्ट कंपनी से पिछले सप्ताह इस्तीफ़ा दे दिया था. उन्हें मोटर दौड़ प्रतियोगिता में भाग लेने से अनिश्चितकाल के लिए प्रतिबंधित कर दिया गया है.
एफ़आईए ने जाँच में सहयोग देने के लिए दो अन्य ड्राइवर फर्नांडो अलोन्सो और नेल्सन पिकेट जूनियर को धन्यवाद दिया और उन पर कोई जुर्माना नहीं लगाया गया है.
बड़ी राहत
ख़ुद फ़ॉर्मूला-1 कंपनी के लिए यह फ़ैसला एक बड़ी राहत के तौर पर आया है.
फ़ॉर्मूला-1 में व्याप्त वित्तीय अनिश्चितता की वजह से 2008 में होंडा कार कंपनी ने इसे प्रायोजित करने से अपना हाथ खींच लिया था और मौजूदा प्रायोजिक कंपनी बीएमडब्ल्यू भी कुछ ही दिनें इससे हाथ खींच लेगी.
ऐसे में अगर दूसरी बड़ी प्रायोजक कार कंपनी रेनॉल्ट भी अगर फ़ॉर्मूला-1 से हट जाती तो भारी झटका लगता लेकिन संकट के बादल अभी छँटे नहीं हैं.
फ्रेंच कार कंपनी रेनॉल्ट को अपने कारोबार में भारी नुक़सान हो रहा है और फ़ॉर्मूला-1 में उसकी मौजूदगी पर पहले ही सवाल उठाए जाते रहे हैं.
कंपनी के चेयरमैन बर्नार्ड रे पेरिस में हुई इस बैठक के निर्णय पर फिलहाल तो कुछ नहीं कहा है. खेल प्रेमी आने वाले दिनों में यह आकलन भी करेंगे कि इस घटना से फ़ॉर्मूला-1 प्रतियोगिता की प्रतिष्ठा को कितना नुक़सान पहुँचा है.
बीता वर्ष फ़ॉर्मूला-1 के लिए बहुत भारी रहा है. एक प्रतिष्ठित प्रतियोगिता पर बिखराव के बादल छाए रहे हैं, एफ़आईए के मुखिया मैक्स मूसली पर भी सवाल उठते रहे हैं और जालसाज़ी के एक अन्य मामले ने भी इस प्रतियोगिता को ख़बरों में रखा है.