भारत ने दूसरे ही मिनट में पेनल्टी कार्नर पर गोल करके बढ़त बनाई लेकिन उसके बाद जो हुआ, वह हैरान करने वाला है। ये लड़के लंबे समय से साथ खेल रहे हैं लेकिन फिर भी उनमें आपसी तालमेल नजर नहीं आया।
हालैंड के हाथों पहला मैच गंवाने के बाद भारत को यह मैच हर हालत में जीतना था। न्यूजीलैंड की भी यही स्थिति थी लेकिन दोनों टीमों के रवैये में काफी अंतर देखने को मिला। भारतीय तालमेल के साथ विरोधी पर गोल नहीं दाग सके। हर दूसरा पास दिशा से भटका हुआ था। गेंद पर नियंत्रण भी बनाये रखने में खिलाड़ी नाकाम रहे।
न्यूजीलैंड के डिफेंडरों का काम आसान हो गया क्योंकि भारतीय फारवर्ड पंक्ति इतने हमले ही नहीं बोल सकी। भारतीयों ने अपने ही सर्कल में कई गलतियां की और आसान पेनाल्टी कार्नर गंवाये। विरोधी स्ट्राइकरों को मूव बनाने के लिये जगह दी जिसका खामियाजा लगातार गोलों के रूप में भुगतना पड़ा।
दिशाहीन पासिंग ने भारतीयों की मुश्किलें और बढा दी। मुझे भारतीय टीम एक ईकाई के रूप में गोल की कोशिश करती कभी नजर नहीं आई। फारवर्ड खिलाड़ी बिना किसी लक्ष्य के आगे दौड़ रहे थे। सिर्फ व्यक्तिगत खेल नजर आ रहा था लेकिन एक ईकाई के रूप में नहीं।
पेनल्टी कार्नर पर संदीप सिंह ने पहला गोल किया लेकिन न्यूजीलैंड ने तुरंत पेनल्टी कार्नर पर ही बराबरी का गोल दाग दिया। न्यूजीलैंड ने दूसरा गोल पेनल्टी स्ट्रोक पर किया जिसके लिये इग्नेस टिर्की को दोषी नहीं ठहराया जा सकता । वह गोल लाइन पर पेनल्टी कार्नर बचाने की कोशिश में थे लेकिन गेंद स्टिक से टकराकर उनके शरीर से लगी।
तीसरा गोल भारतीयों ने तोहफे में न्यूजीलैंड को दिया। न्यूजीलैंड के फारवर्ड शिया मैकेलीसी ने गेंद पर नियंत्रण बनाया और पहले से ही छितर बितर भारतीय डिफेंस को भेदकर निकोलस विलसन ने गोल कर दिया।