गौरतलब है कि तमाम प्रयासों के बाद भी भारतीय हॉकी टीम कुछ बेहतर नहीं कर पार रही है। जहां टीम बीजिंग ओलंपिक में क्वालीफाई ही नहीं कर पाई थी वहीं लंदन ओलंपिक 2012 में एक भी मैच जीतने में कामयाब नहीं हो सकी। हालांकि खेल विश्लेषकों का मानना है कि इस लीग के आयोजन से हॉकी का स्तर ऊपर उठाने में सहायता मिलेगी, साथ ही विश्व के अन्य शीर्ष खिलाडि़यों के साथ खेलने से भारतीय खिलाडि़यों को भी लाभ मिलेगा।
विश्व के नंबर एक खिलाड़ी और पंजाब वॉरियर्स टीम के कप्तान जेमी ड्वायर का कहना है कि इस लीग में खेलने से भारत के खिलाडि़यों को काफी कुछ सीखने को मिलेगा। खेल विश्लेषकों का कहना है कि इतने लंबे समय तक चलने वाली लीग में खुद को फिट रखना खिलाडि़यों के लिए आसान नहीं होगा। इसलिए जीत उसी टीम की होगी जिसके खिलाड़ी अपनी फिटनेस को बरकरार रख सकेंगे।
इस तरह की लीग का प्रारम्भ 2005 में प्रीमियर हॉकी लीग के नाम से भी किया गया था लेकिन प्रायोजकों की अरूचि और हॉकी इंडिया के आंतरिक विवाद के बाद इसे बंद कर दिया गया। वैसे इस बार लीग में कई विश्वस्तरीय और बड़े खिलाड़ी शामिल किये गये हैं।