आज ओलंपिक में पदक जीतने पर खिलाडि़यों पर धन वर्षा होने लगती है लेकिन जिम्बाब्वे (तब रोडेशिया) के पास अपने खिलाडि़यों को सम्मानित करने के लिये पैसा नहीं था इसलिए उसने यह नया तरीका निकाला था। मास्को ओलंपिक का कई देशों ने बहिष्कार किया था और जिम्बाब्वे की टीम को आखिरी क्षणों में न्यौता भेजा गया था।
आनन फानन में तैयार की गयी यह टीम पूरी प्रतियोगिता में अजेय रही थी। ओलंपिक में शुरू से ही इसी तरह की कुछ रोचक घटनाएं होती रही जैसे कि महिलाओं का लंबे समय तक मैराथन में भाग नहीं लेना। मैराथन शुरू से ओलंपिक का हिस्सा रही है लेकिन इसमें महिलाओं ने 1984 में लास एंजिल्स ओलंपिक में पहली बार भाग लिया था।
असल में चिकित्सकों ने दावा कर दिया था कि मैराथन जैसी लंबी दूरी तक दौड़ने से महिलाएं कम उम्र में अधिक उम्र की दिखने लग जाती हैं। यदि मैराथन की ही बात करें तो 1904 में सेंट लुई में हुए ओलंपिक में फ्रेड लार्ज नाम के मैराथन धावक ने आयोजकों को धोखा देने की कोशिश की थी। उन्होंने अधिकतर दूसरी कार में बैठकर पूरी की लेकिन आयोजकों को इसका पता लग गया और लार्ज को अयोज्ञ ठहरा दिया गया।