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Tokyo Special: पाकिस्तान को जाल में फंसा कर भारत ने यूं जीता था हॉकी का गोल्ड मेडल

नई दिल्ली। भारत को आजाद हुए नौ साल हुए थे। 1950 में ही संविधान बन चुका था। संसदीय शासन मजबूती से स्थापित हो चुका था। दूसरी तरफ राजनीतिक उथल पुथल के बीच 1956 में पाकिस्तान एक इस्लामिक देश बन गया था। वहां धार्मिक कट्टरता का बोलबाला थ। 1948 में दोनों देशों के बीच युद्ध भी हो चुका था। बंटवारे ने जो घाव दिये थे उससे दोनों मुल्कों में दुश्मनी की भावना चरम पर थी। इस बीच मेलबॉर्न ओलम्पिक (1956) के हॉकी फाइनल में वक्त ने भारत और पाकिस्तान को एक दूसरे के खिलाफ खड़ा कर दिया था। इसके पहले ओलम्पिक हॉकी में भारत और पाकिस्तान के बीच कभी भिडंत नहीं हुई थी।

दोनों टकराये भी तो ऐसे मैच में जिसके बिना पर सोने का तमगा तय होने वाला था। जंग से मिलते जुलते हालात बनने लगे। ऐसे तनाव के बीच हार कर कोई टीम देशवासियों की नजर में गिरना नहीं चाहती थी। भारत पर दबाव था कि हॉकी में वह अपनी बादशहत बरकरार रखे। तब भारत ने पाकिस्तान को हराने के लिए एक जाल बुन जिसमें वह बुरी तरह फंस गया। भारत ने लगातार छठी बार गोल्ड मेडल जीता। इस जीत के रणनीतिकार थे कप्तान बलबीर सिंह सीनियर और मैच के हीरो थे रणधीर सिंह जेंटल। भारत के गोलकीपर शंकर लक्ष्मण थे जिन्होंने पूरी प्रतियोगिता में एक भी गोल नहीं खाया।

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जाल बिछाने के पहले

बलबीर सिंह सीनियर को मेजर ध्यानचंद के बाद भारत का दूसरा करिश्माई खिलाड़ी माना जाता है। बलबीर सिंह की रफ्तार और ड्रिब्लिंग में ध्यानचंद की छाप थी। वे सेंटर फॉरवर्ड पोजिशन से खेलते थे। बीच मैदान में भी अगर उन्हें गेंद मिल जाती तो वे कई खिलाड़ियों को छकाते हुए गेंद गोलपोस्ट में डाल कर ही दम लेते। तब पूरी दुनिया में उन्हें सर्वश्रेष्ठ स्ट्राइकर माना जाता था। विपक्षी टीम उनके नाम से दहशत खाती थी। 1956 के मेलबॉर्न ओलम्पिक में भारत का पहला मैच अफगानिस्तान से था। भारत ने अफगानिस्तान को 14-0 से हराया। लेकिन इस मैच में भारत के कप्तान बलबीर सिंह सीनियर की उंगलियों में फ्रैक्चर आ गया। उन्हें बाकी मैचों से हटना पड़ा। उनकी गैरमौजूदगी में उधम सिंह, रणधीर सिंह जेंटल, लेसली क्लॉडियस, हरदयाल सिंह गरचे, गुरदेव सिंह ने लाजवाब खेल दिखाया। प्रतियोगिता में 12 टीमें थीं जिन्हें चार ग्रुप में रखा गय था। भारत ग्रुप ए में था। उसने अफगनिस्तान को 14-0, अमेरिका को 16-0 और सिंगापुर को 6-0 से हर कर ग्रुप में पहला स्थान हासिल किया। सेमीफाइनल में भारत ने जर्मनी को 1-0 से हरा कर फाइनल का टिकट कटाया। दूसरे सेमीफाइल में पाकिस्तान ने ब्रिटेन को 3-2 से हराया। अब भारत और पाकिस्तान में फाइनल मुकाबला होना था।

भारत ने पाकिस्तान को ऐसे फंसाया जाल में

दुनिया के सबसे खतरनाक सेंटर फॉरवर्ड बलबीर सिंह सीनियर घायल थे। पकिस्तान की टीम राहत महसूस कर थी। बलबीर सिंह घायल थे। उनकी एक उंगली इतनी टूट गयी थी कि वो ठीक से स्टिक भी नहीं पकड़ पा रहे थे। अगर वो खेलते तो सौ फीसदी नहीं दे पाते। वे करो या मरो के मैच में खेलना तो चाहते थे लेकिन इंजुरी इसकी इजाजत नहीं दे रही थी। उन्होंने कोच से बात की। तब कप्तान बलबीर सिंह और कोच ने एक स्ट्रेट्जी बनायी। कोच ने कहा, कभी-कभी मैच जीतने के लिए मनोवैज्ञानिक दबाव बनाना जरूरी होता है। अगर बलबीर सिंह मैदान में होगा तो विपक्षी टीम यूं ही दबाव में आ जाएगी। उस समय बलबीर सिंह के गोल करने की क्षमता से पूरी दुनिया खौफ खाती थी। उन्हें रोकने के लिए विपक्षी दल के कम से कम दो खिलाड़ी उन्हें 'मार्क’ करने के लिए लगाये जाते थे। अगर वे खेलेंगे और पाकिस्तान के दो खिलाड़ी उन्हें मार्क करेंगे तो केवल आठ खिलाड़ी ही गोल करने के लिए 'मूव’ बनाएंगे। इस स्थिति में भारत के पास बेहतर मौका होगा। तय हुआ कि बलबीर सिंह खेलेंगे लेकिन ये बात सिर्फ कोच और कप्तान के बीच रहेगी। साथी खिलाड़ियों से भी ये बात छिपा ली गयी। कोच ने बलबीर सिंह से कहा कि वे मिलने पर किसी से हाथ न मिलाएं, दूर से हाथ हिला कर अभिवादन करें। उनकी उंगलियों के चोटिल होने की बात छिपानी जरूरी थी। इन सारी बातों को गुप्त रखा गया।

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6 दिसबर 1956- पाकिस्तान को यूं पटका

फाइनल मुकाबले में जब बलबीर सिंह सीनियर खेलने उतरे तो पकिस्तान टीम भौंचक्की रह गयी। वह तो यही मान कर चल रही थी कि भारत के घायल कप्तान खेलने की स्थिति में नहीं हैं। बलबीर सिंह दर्द का इंजेक्शन लेकर मैच खेलने उतरे। पकिस्तान के दो खिलाड़ी उन्हें मार्क करने में फंसे रहे। इसका फायदा भारत के अन्य फॉरवर्ड खिलड़ियों ने उठाया। भारत की अग्रिम पंक्ति पाकिस्तान के गोलपोस्ट पर धावा बोलने लगी। पकिस्तान ने भी पूरा दमखम लगाया। खेल पहले 37 मिनट में कोई गोल नहीं हुआ। 38वें मिनट में भारत को पेनल्टी कॉर्नर मिला। भारत के रणधीर सिंह जेंटल ने इसे गोल तब्दील कर भारत को 1-0 से आगे कर दिया। बलबीर सिंह को मार्क करने के चक्कर में पाकिस्तान के फॉरवर्ड अपनी क्षमता के मुताबिक खेल नहीं दिख पाये। वे भारत के डी एरिया में कोई बड़ी हलचल नहीं मचा सके। पाकिस्तान ने कुछ मौके बनाये भी तो भारतीय गोलकीपर शंकर लक्ष्मण लोहे की दीवार की तरह बीच में खड़े रहे।(1956 के ओलम्पिक में कोई टीम भारत के खिलाफ एक भी गोल नहीं कर पायी थी।) पाकिस्तान कोई गोल नहीं कर पाया और फाइनल मुकाबला 1-0 से हार गया। खेल के मैदान में भारत ने पाकिस्तान को हरा कर तिरंगे की शान को और ऊंचा कर दिया।

Story first published: Saturday, June 26, 2021, 21:49 [IST]
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