अज़रबैजान के एक एथलीट और खेल प्रशासक ने खेल की दुनिया में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने 15 साल की उम्र में जूडो की शुरुआत की। खेल के प्रति उनके जुनून ने उन्हें 2003 में क्यूबेक, कनाडा में विश्व खेलों में अज़रबैजान का प्रतिनिधित्व करने के लिए प्रेरित किया।

| Season | Event | Rank |
|---|---|---|
| 2008 | Men's +100kg | G स्वर्ण |
| 2004 | Men's +100kg | G स्वर्ण |
| 2020 | Men's +100kg | B कांस्य |
| 2012 | Men's +100kg | B कांस्य |
| 2016 | Men's +100kg | 5 |
2012 में, उन्होंने लंदन में कांस्य पदक जीता, इसके बाद 2020 में टोक्यो में एक और कांस्य पदक जीता। इस उपलब्धि ने उन्हें पैरालंपिक खेलों के चार अलग-अलग संस्करणों में पदक जीतने वाले पहले अज़रबैजान के एथलीट बना दिया।
फरवरी 2020 में, उन्होंने राष्ट्रीय टीम के साथ एक प्रशिक्षण शिविर के दौरान अपने पैर में एक लिगामेंट फाड़ दिया। उस वर्ष बाद में, उन्होंने अपने दाहिने कोहनी में चोट के लिए सर्जरी करवाई। इन असफलताओं के बावजूद, उन्होंने 2021 की शुरुआत में प्रशिक्षण फिर से शुरू कर दिया।
उनकी उपलब्धियों ने उन्हें कई प्रशंसा दिलाई है। टोक्यो 2020 पैरालंपिक खेलों में अपने कांस्य पदक के लिए उन्हें सेवा के लिए आदेश [प्रथम श्रेणी] प्राप्त हुआ। लंदन 2012 खेलों में अपने कांस्य पदक के लिए, उन्हें तारागी [प्रगति] पदक से सम्मानित किया गया।
2021 में, अज़रबैजान की राष्ट्रीय पैरालंपिक समिति की 25वीं वर्षगांठ पर, उन्हें सेवा के लिए आदेश [तृतीय श्रेणी] प्राप्त हुआ। 2019 में, उन्हें युवा और खेल मंत्रालय द्वारा अज़रबैजान के मानद कोच का खिताब दिया गया।
वह अज़रबैजान की राष्ट्रीय पैरालंपिक समिति के उपाध्यक्ष रहे हैं। उनका लक्ष्य घायल दिग्गजों को पैरा खेलों में शामिल होने के लिए प्रोत्साहित करना है। उनका मानना है कि खेल व्यक्तियों को समाज में एकीकृत करने और सफलता प्राप्त करने में मदद करता है।
आगे देखते हुए, उनका लक्ष्य 2024 के पेरिस पैरालंपिक खेलों में स्वर्ण पदक जीतना है। वह पेरिस के बाद अपने करियर के बारे में अंतिम निर्णय लेने की योजना बना रहे हैं। यदि कोई युवा जूडोका उन्हें हरा देता है, तो वह अपने करियर को समाप्त करने पर विचार करेंगे।
खेल के प्रति उनकी समर्पण और दूसरों पर उनके प्रभाव अज़रबैजान में पैरा खेलों को बढ़ावा देने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका को उजागर करते हैं। उनकी यात्रा कई आकांक्षी एथलीटों को प्रेरित करती रहती है।