ईरान के कर्मनशाह के एक प्रमुख भारोत्तोलक, किआनोश रोस्टामी ने 10 साल की उम्र में इस खेल की शुरुआत की। शुरू में जिम्नास्टिक में शामिल होने के बाद, उन्होंने अपने भाई के प्रोत्साहन से भारोत्तोलन में परिवर्तन किया। "मेरे भाई ने मेरे साथ भारोत्तोलन का प्रशिक्षण लिया और मुझे बताया, 'तुम भारोत्तोलन में आ रहे हो'," रोस्टामी याद करते हैं।

| Season | Event | Rank |
|---|---|---|
| 2016 | Men's 85kg | G स्वर्ण |
| 2012 | Men's 85kg | S रजत |
अपनी सफलताओं के बावजूद, रोस्टामी को चुनौतियों का सामना करना पड़ा। 2017 की शुरुआत में, प्रशिक्षण में भाग नहीं लेने के कारण उन्हें कोच सज्जाद अनौशीरावानी ने राष्ट्रीय टीम से बाहर कर दिया था। रोस्टामी ने बताया कि वह 2016 के ओलंपिक के बाद आराम कर रहे थे। वह उसी वर्ष बाद में अमेरिका के एनाहिम में विश्व चैंपियनशिप के लिए राष्ट्रीय टीम में फिर से शामिल हो गए।
2017 में, रोस्टामी को एनाहिम में विश्व चैंपियनशिप के दौरान घुटने में चोट भी लगी। इस चोट ने उन्हें परेशान किया लेकिन खेल के प्रति उनकी प्रतिबद्धता में कोई कमी नहीं आई।
जुलाई 2018 में, रोस्टामी ने इंडोनेशिया में एशियाई खेलों के लिए 85 किलो वजन वर्ग से 94 किलो वर्ग में जाने का फैसला किया। "मैं एक नई चुनौती चाहता था। आठ साल तक, मैं 85 किलो वर्ग का सर्वश्रेष्ठ एथलीट था और मैं खुद को यह दिखाना चाहता था कि मैं दूसरे वजन में भी सफल हो सकता हूँ," उन्होंने कहा। 2019 में, उन्होंने नए स्थापित 96 किलो वर्ग में बदलाव किया।
नवंबर 2017 में, रोस्टामी ने घोषणा की कि वह 2016 के ओलंपिक में अपने स्वर्ण पदक को ईरान में भूकंप से प्रभावित लोगों की मदद के लिए नीलामी करेंगे। "मैं इसे अपने कर्तव्य के रूप में मानता हूँ कि मैं एक छोटा सा कदम उठाऊँ, ताकि मेरे प्यारे साथी देशवासियों की मदद की जा सके जो भूकंप के कारण पीड़ित हुए हैं," उन्होंने कहा।
आगे देखते हुए, रोस्टामी का लक्ष्य भविष्य के ओलंपिक खेलों में एक और स्वर्ण पदक जीतना है। उनकी समर्पण और लचीलापन भारोत्तोलन समुदाय में कई लोगों को प्रेरित करता रहता है।
रोस्टामी की यात्रा जीत और चुनौतियों से भरी है। उनकी कहानी उनके खेल के प्रति अटूट प्रतिबद्धता और मुश्किल समय में अपने समुदाय का समर्थन करने की उनकी इच्छा को उजागर करती है।