कनाडा के क्यूबेक के ट्रोइस-रिविरेस की रहने वाली लॉरेंस विन्सेंट-लापोइंट, एक समर्पित एथलीट हैं जिन्होंने कैनोइंग की दुनिया में महत्वपूर्ण प्रगति की है। उन्होंने पहली बार 12 साल की उम्र में क्यूबेक के शॉविनिगन में पैडलिंग की कोशिश की। अपनी लंबाई के कारण शुरुआती चुनौतियों के बावजूद, उन्होंने दृढ़ता से काम किया और अंततः इस खेल में उत्कृष्टता हासिल की।

| Season | Event | Rank |
|---|---|---|
| 2021 | Women's C1 200m | S रजत |
| 2021 | Women's C2 500m | B कांस्य |
वह क्यूबेक में ट्रोइस रिविरेस क्लब के साथ राष्ट्रीय कोच जान क्रुक और निजी कोच मैथ्यू पेल्टियर के मार्गदर्शन में अभ्यास करती हैं। अपने पूरे करियर में प्रशिक्षण के प्रति उनकी समर्पण स्पष्ट रहा है।
उनके माता-पिता उनके करियर में सबसे प्रभावशाली लोग रहे हैं। वह कनाडाई स्प्रिंट पैडलर शीला कुइपर और अमेरिकी स्प्रिंट पैडलर पामेला बोटलर को भी देखती हैं। इन एथलीटों ने उन्हें पानी के अंदर और बाहर दोनों जगह प्रेरित किया है।
विन्सेंट-लापोइंट की कड़ी मेहनत का फल तब मिला जब उन्होंने 2018 में वर्ल्ड पैडल अवार्ड्स में अकादमी अवार्ड जीता। इस मान्यता ने उन्हें अपने क्षेत्र के शीर्ष एथलीटों में से एक के रूप में स्थापित किया।
उनका खेल दर्शन सरल लेकिन शक्तिशाली है: "कभी हार मत मानो, यह सिद्धांत है जिसका पालन मैंने जीवन भर किया है।" इस आदर्श वाक्य ने उन्हें कई चुनौतियों और सफलताओं से गुजारा है।
वह टोक्यो में 2020 ओलंपिक खेलों में प्रतिस्पर्धा करने का मौका मिलने पर बहुत खुश हैं। 2017 में महिलाओं के ओलंपिक कार्यक्रम में उनके कार्यक्रम, C1 200m और C2 500m को शामिल करना एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर था। कुइपर और बोटलर से प्रेरित होकर, जिन्होंने वर्षों तक मान्यता के लिए प्रचार किया, विन्सेंट-लापोइंट का लक्ष्य यह साबित करना था कि महिलाएं कैनोइंग में उत्कृष्टता प्राप्त कर सकती हैं।
आगे देखते हुए, विन्सेंट-लापोइंट का लक्ष्य ओलंपिक खेलों में C1 200m या C2 500m में स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली महिला एथलीट बनना है। उनके दृढ़ संकल्प और पिछली उपलब्धियाँ बताती हैं कि वह इस लक्ष्य को प्राप्त करने की राह पर हैं।
विन्सेंट-लापोइंट की संघर्षरत नौसिखिए से लेकर पुरस्कार विजेता एथलीट तक की यात्रा उनकी लचीलापन और समर्पण का प्रमाण है। उनकी कहानी खेल की दुनिया में कई लोगों को प्रेरित करती रहती है।