भारतीय टेनिस के जाने-माने खिलाड़ी लिएंडर पेस ने 10 साल की उम्र में इस खेल की शुरुआत की थी। टेनिस के प्रति उनके जुनून ने उन्हें इसे एक व्यवहार्य करियर विकल्प के रूप में मानने के लिए प्रेरित किया। वर्षों से, पेस भारतीय खेलों में एक महत्वपूर्ण व्यक्ति बन गए हैं, जो अपनी समर्पण और उपलब्धियों के लिए जाने जाते हैं।

| Season | Event | Rank |
|---|---|---|
| 2016 | Men's Doubles | Round 1 |
| 2012 | Mixed Doubles | 5 |
| 2012 | Men's Doubles | 9 |
| 2008 | Men's Doubles | 5 |
| 2004 | Men's Doubles | 4 |
| 2000 | Men's Doubles | 9 |
| 2000 | Men's Singles | 33 |
| 1996 | Men's Singles | B कांस्य |
| 1996 | Men's Doubles | Round 2 |
| 1992 | Men's Doubles | Quarterfinal |
| 1992 | Men's Singles | Round 1 |
पेस की सबसे उल्लेखनीय उपलब्धियों में से एक 1996 के अटलांटा ओलंपिक खेलों में पुरुष एकल में कांस्य पदक जीतना है। इस जीत ने 1952 के बाद भारत का पहला व्यक्तिगत ओलंपिक पदक और इसका पहला ओलंपिक टेनिस पदक चिह्नित किया। 2012 तक पेस छह ओलंपिक खेलों में भाग लेने वाले पहले भारतीय एथलीट बन गए और 2016 के रियो डी जनेरियो खेलों में उन्होंने इस रिकॉर्ड को सात तक बढ़ाया।
1999 में, पेस और महेश भूपति 1952 के बाद से एक ही वर्ष में सभी चार ग्रैंड स्लैम के फाइनल में पहुंचने वाली पहली युगल जोड़ी बनी। जून 2016 में, पेस ने इतिहास रचते हुए 10 ग्रैंड स्लैम मिश्रित युगल खिताब जीतने वाले पहले पुरुष खिलाड़ी बन गए, फ्रेंच ओपन में स्विस पार्टनर मार्टिना हिंगिस के साथ मिश्रित युगल में करियर स्लैम पूरा किया।
पेस को अपने करियर के दौरान कई प्रतिष्ठित पुरस्कार मिले हैं। 2001 में, उन्हें भारतीय खेलों में उनके योगदान के लिए पद्म श्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया था, उसके बाद 2014 में पद्म भूषण पुरस्कार मिला। उन्हें 2000 के सिडनी ओलंपिक खेलों के उद्घाटन समारोह में भारत का ध्वजवाहक होने का सम्मान भी प्राप्त हुआ।
लिएंडर पेस एक ऐसे परिवार से आते हैं जिसका खेलों में समृद्ध इतिहास है। उनके पिता, वेस पेस, भारत के लिए फील्ड हॉकी खेले और 1972 के म्यूनिख ओलंपिक खेलों में कांस्य पदक जीता। उनकी माँ, जेनिफर पेस, ने भारत का प्रतिनिधित्व बास्केटबॉल में किया। लिएंडर की एक बेटी है जिसका नाम आयना है।
पेस को अपने करियर के दौरान कई बड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ा। 2000 में, उनकी दाहिनी कलाई में टेंडन फट गया, जिसके कारण उन्हें तीन महीने के लिए प्रतियोगिता से ब्रेक लेना पड़ा। 2003 में, उन्हें संदिग्ध ब्रेन ट्यूमर के साथ अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जिसे बाद में एक परजीवी संक्रमण के रूप में निदान किया गया।
अपने टेनिस करियर के अलावा, पेस ने अभिनय में भी कदम रखा। उन्होंने 2013 में रिलीज हुई भारतीय फिल्म 'राजधानी एक्सप्रेस' में मुख्य भूमिका निभाई, जो एक थ्रिलर फिल्म थी।
आगे देखते हुए, लिएंडर पेस का लक्ष्य भारतीय खेलों में योगदान देना जारी रखना है। हालांकि 2020 से आगे की विशिष्ट भविष्य की महत्वाकांक्षाओं के बारे में विस्तार से नहीं बताया गया है, लेकिन टेनिस में उनकी विरासत और चल रही भागीदारी प्रभावशाली बनी हुई है।
लिएंडर पेस की यात्रा कई मील के पत्थरों और पुरस्कारों से चिह्नित है जिसने भारतीय खेल इतिहास को महत्वपूर्ण रूप से प्रभावित किया है। उनका समर्पण और लचीलापन पूरे देश में कई महत्वाकांक्षी एथलीटों को प्रेरित करता रहता है।