भारत के मुक्केबाज जितेंद्र कुमार (51 किग्रा), अखिल कुमार (54 किग्रा), अंतरेश लाकड़ा (57 किग्रा) और दिनेश कुमार (81 किग्रा) ने आशा के अनुरूप प्रदर्शन करते हुए विश्व कप में सेमीफाइनल तक का सफर तय किया था। चारों को एक-एक कांस्य पदक मिला।
मंगलवार को जैसे ही चारों मुक्केबाज हवाई अड्डे से बाहर निकले, काफी समय से इंतजार कर रहे प्रशंसकों ने उन्हें फूलमालाओं से लाद दिया। बहुत सारे प्रशंसक ढोल-नगाड़ों के साथ भी पहुंचे थे। अपने चहेते खिलाड़ियों के स्वागत के लिए हवाई अड्डे के बाहर उत्सव का माहौल था। भारतीय मुक्के बाजी संघ के महासचिव पी. के. मुरलीधरन राजा ने इन सभी खिलाड़ियों की अगवानी की।
प्रशंसकों ने तो अपने चहेते मुक्के बाजों का दिल खोलकर स्वागत किया लेकिन भारतीय मुक्के बाजी संघ इन कांस्य पदक विजेताओं के प्रति लगभग उदासीन बना रहा। संघ के महासचिव पी. के. मुरलीधरन राजा ने हवाईअड्डे पर इन मुक्के बाजों की आगवानी की औपचारिकता जरूर पूरी की, लेकिन संघ ने इन खिलाड़ियों के हवाईअड्डे से उनके घर तक पहुंचाने का कोई इंतजाम किया। चारों कांस्य पदक विजेताओं को टैक्सी लेकर अपने घर की राह पकड़नी पड़ी।
भारतीय मुक्के बाजी संघ की उदासीनता यह मामला लोकसभा में भी उठा। लोकसभा अध्यक्ष सोमनाथ चटर्जी ने पदक जीत कर लौटे सभी मुक्के बाजों को बधाई दी और उनके सुनहरे भविष्य की कामना की। इस पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के संतोष गंगवार ने हस्तक्षेप करते हुए कहा, "बहुत दुख की बात है कि हवाईअड्डे पर देश की तरफ से किसी ने इन खिलाड़ियों का स्वागत नहीं किया और ये खिलाड़ी वहां से टैक्सी से आए। खेल मंत्रालय से संबंधित अधिकारियों को इस ओर ध्यान देना चाहिए।"
चटर्जी ने इस पर अपनी प्रतिक्रिया में कहा, "मुक्के बाजी संघ के आला अधिकारियों को इस मामले पर सोचना और आत्मावलोकन करना चाहिए। हालांकि इससे खिलाड़ियों की सफलता और उनके प्रदर्शन का महत्व नहीं घट जाता। "
इन मुक्केबाजों ने अपने प्रदर्शन से भारतीय मुक्केबाजी को एक नई ऊंचाई तक पहुंचाया है। भारत ने विश्व कप मुक्केबाजी में 14 साल पहले एक पदक जीता था।
उधर, अखिल ने आईएएनएस से कहा, "अगर हमने स्वर्ण या रजत पदक जीता होता तो हमें ज्यादा खुशी होती। हालांकि हमने अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया और बेहतर परिणाम के साथ लौटे। हमें इस बात की खुशी है। व्यक्तिगत तौर पर मैं स्वर्ण जीतना चाहता था। हार से मुझे सबक मिला है। स्वर्ण हासिल करने के लिए मैं अब और मेहनत करुं गा।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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