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मुक्केबाजों का स्वागत फीका नहीं, सरकार से खास मदद नहीं: चौटाला

नई दिल्ली, 17 दिसम्बर (आईएएनएस)। भारतीय एमेच्योर मुक्केबाजी महासंघ (आईएबीएफ) के अध्यक्ष अभय सिंह चौटाला का कहना है कि विश्व कप मुक्केबाजी में कांस्य पदक जीतकर लौटे देश के चार मुक्केबाजों के स्वागत में कोई कमी नहीं रही है। उल्लेखनीय है कि मुक्केबाजों के फीके स्वागत का मामला मंगलवार को संसद में उठा था, जिस पर प्रतिक्रिया जाहिर करते हुए लोकसभा अध्यक्ष सोमनाथ चटर्जी ने देश का नाम रोशन करने वाले खिलाड़ियों के स्वागत को लेकर आईएबीएफ को आत्ममंथन की सलाह दी थी।

चौटाला ने आईएएनएस से बातचीत में कहा कि मीडिया पहले यह तय कर ले कि उसे क्या लिखना और दिखाना है। कुछ समाचार पत्र और चैनल यह प्रचारित कर रहे हैं कि मास्को से लौटने के बाद मुक्केबाजों का ठीक से स्वागत नहीं हुआ, जबकि कुछ का कहना है कि उनके स्वागत में कोई कमी नहीं हुई। जहां तक मुक्केबाजों को टैक्सी से घर भेजने का सवाल है तो आईएबीएफ हमेशा से ऐसा ही करता आया है। ओलंपिक के बाद भी खिलाड़ी टैक्सी से ही घर गए थे।

चौटाला ने कहा अगर मीडिया को लगता है कि मुक्केबाजों का ठीक से स्वागत नहीं हुआ तो, वे उन्हीं से बात करें क्योंकि उनसे बेहतर और कोई नहीं बता सकता कि उनके लिए जो व्यवस्था की गई थी वह ठीक थी या नहीं। मुक्केबाजों के मीडिया से मुखातिब नहीं होने के सवाल पर चौटाला ने कहा कि मध्यरात्रि में संवाददाता सम्मेलन बुलाने का कोई औचित्य नहीं था, यही कारण है कि इसके लिए कोई सूचना नहीं दी गई। जहां तक खिलाड़ियों की बात है तो वे किसी अंतर्राष्ट्रीय टूर्नामेंट के बाद सीधे अपने परिजनों से मिलना पसंद करते हैं, न कि दिल्ली या किसी अन्य शहर में रुककर अगले दिन मीडिया से बात करना।

राष्ट्रमंडल और ओलंपिक खेलों के मद्देनजर भविष्य की योजनाओं के बारे में पूछे जाने पर चौटाला ने कहा कि आईएबीएफ ने जमीनी स्तर पर खिलाड़ियों को संवारने के लिए कैंप चलाए हैं लेकिन उनमें सुविधाओं की कमी है क्योंकि सरकार से आईएबीएफ को कोई मदद नहीं मिल रही है। आगे की योजनाओं के बारे में पूछे जाने पर चौटाला ने दो-टूक लहजे में कहा कि इसके लिए सरकार से बात की जाए तो बेहतर होगा क्योंकि बार-बार आग्रह के बाद भी आईएबीएफ को अपेक्षित मदद नहीं मिली है।

चौटाला के मुताबिक 2012 में लंदन में होने वाले ओलंपिक खेलों में महिला मुक्केबाजी को भी शामिल किया जा सकता है लेकिन भारत सरकार महिला मुक्केबाजों के प्रशिक्षण के प्रति पूरी तरह उदासीन है। ऐसे में भला कोई मुक्केबाज ओलंपिक को ध्यान में रखकर कैसे तैयारी कर सकती है।

मुक्केबाजी जगत में कारपोरेट समूहों को आकर्षित करने के सवाल पर चौटाला ने कहा कि हाल की सफलताओं के कारण कई कारपोरेट समूह मुक्केबाजों के साथ जुड़े हैं लेकिन इससे सिर्फ खिलाड़ियों को ही फायदा हो रहा है। इससे आईएबीएफ या फिर मुक्केबाजी के खेल को कोई फायदा नहीं हो रहा है। चौटाला के मुताबिक कारपोरेट समूह सिर्फ और सिर्फ क्रिकेट पर पैसा खर्च करना चाहते हैं, उन्हें दूसरे खेलों खासतौर पर मुक्केबाजी से कोई सरोकार नहीं।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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Story first published: Tuesday, November 14, 2017, 12:21 [IST]
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