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जुनून ने बनाया युकी को चैंपियन : इंदु भांबरी (संशोधन : वीणा भांबरी की जगह इंदु भांबरी)

By Staff

जयंत के. सिंह

नई दिल्ली, 31 जनवरी (आईएएनएस)। वर्ष के पहले ग्रैंड स्लैम आस्ट्रेलियन ओपन के जूनियर वर्ग के नए चैंपियन भारत के होनहार टेनिस खिलाड़ी युकी भांबरी अपना पहला ग्रैंड स्लैम खिताब जीतने को लेकर पूरी तरह आश्वस्त थे।

युकी की मां इंदु भांबरी ने आईएएनएस से विशेष बातचीत के दौरान कहा कि उनके बेटे ने पिछले साल सेमीफाइनल में मिली हार के बाद ही ठान लिया था कि उसे इस बार यह खिताब किसी भी सूरत में हासिल करना है।

इंदु ने कहा, "युकी एक जुनूनी खिलाड़ी है। पिछले साल जब उसे आस्ट्रेलियन ओपन के सेमीफाइनल में हार मिली थी, तभी से वह इस खिताब को जीतने के प्रति ज्यादा गंभीर हो गया था। इस साल उसने इस खिताब को हासिल करने के लिए जोरदार मेहनत की। अपनी तैयारियों को अंतिम रूप देने और आस्ट्रेलिया के गर्म मौसम के साथ तालमेल बिठाने के लिए वह एक सप्ताह पहले ही अपने कोच आदित्य सचदेवा के साथ आस्ट्रेलिया पहुंच गया।"

इंदु कहती हैं कि युकी ने विदेश में प्रशिक्षिण प्राप्त किया है, लिहाजा वह गर्मी और उमस में खेलने का आदी नहीं था। अपनी इसी कमी को दूर करने के लिए वह चेन्नई ओपन में हिस्सा लेने गया, जहां काफी उमस थी। चेन्नई में खेलने से युकी को आस्ट्रेलियन ओपन के मद्देनजर काफी फायदा मिला।

बकौल इंदु, "मैं युकी के साथ चेन्नई गई थी। वहां उसने अपनी फिटनेस पर काफी ध्यान दिया। उससे पहले भी वह अपनी फिटनेस को लेकर ही ज्यादा चिंतित था। उसे पता था कि उसका रिटर्न, वॉली और सर्विस काफी अच्छी है, लिहाजा बड़ी सफलता हासिल करने के लिए उसे केवल अपनी फिटनेस सुधारने की जरूरत है।"

" इसी के मद्देनजर उसने चेन्नई ओपन के फाइनल में पहुंचने वाले भारत के एक अन्य टेनिस स्टार सोमदेव देवबर्मन के साथ लगभग एक घंटे अभ्यास किया। अभ्यास के दौरान मैंने महसूस किया कि युकी का खेल किसी मायने में सोमदेव से कम नहीं था। उम्र में अंतर के कारण वह कहीं-कही पिछड़ता नजर आया लेकिन मैं इस बात लेकर चिंतित नहीं था। मैं जानती थी कि अपनी उम्र के लड़कों में वह सर्वश्रेष्ठ है और इस बात ने युकी को भी जबरदस्त आत्मविश्वास दिया।"

यह पूछे जाने पर कि क्या युकी भारत में रहकर टेनिस खेलते हुए दूसरे खिलाड़ियों को प्रेरित करेंगे या फिर विदेश में रहेंगे? इंदु ने कहा, "विदेश में रहेगा तो उसे ज्यादा मौके मिलेंगे। समय-समय पर वह भारत आता रहेगा लेकिन इस उम्र में उसे एक्पोजर मिलना बहुत जरूरी है। अब वह बड़े खिलाड़ियों की श्रेणी में शामिल हो चुका है, इसे काबिज रखने के लिए उसे मेहनत भी उतनी ही करनी होगी। जहां तक भारत में खिलाड़ियों को प्रेरित करने की बात है तो इसके लिए यहां पहले से ही कई दिग्गज खिलाड़ी हैं।"

खेल और शिक्षा के साथ युकी कैसे तालमेल बनाते हैं? इस सवाल के जवाब में इंदु ने कहा, "वह कभी मथुरा रोड स्थित डीपीएस स्कूल में पढ़ा करता था लेकिन कक्षा 10 के बाद उसने ओपन स्कूल में दाखिला ले लिया। वह पढ़ने में काफी अच्छा है लेकिन इसके लिए उसे वक्त नहीं मिल पाता था। ओपन स्कूल में रहकर वह अपनी तैयारियां अच्छी तरह कर सकता है। खेल हो या पढ़ाई हमें उसे कभी भी प्रेरित करने की जरूरत नहीं पड़ती।"

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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Story first published: Tuesday, November 14, 2017, 12:21 [IST]
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