दलीप ट्रॉफी : 13 साल बाद खिताब के लिए उतरेगा दक्षिण क्षेत्र
दक्षिण क्षेत्र की टीम 13 साल बाद एक बार फिर इस खिताब पर कब्जा करने के लिए उतरेगी।
दोनों टीमें बल्लेबाजी के लिहाज से काफी मजबूत हैं। ऐसी स्थिति में दोनों टीमों के गेंदबाजों को खिताबी मुकाबले में अहम किरदार निभाना होगा। जहां तक पिच की स्थिति की बात है तो यह फिलहाल सूखी है और दूसरे दिन के बाद यह स्पिनरों को मदद कर सकती है।
दक्षिण क्षेत्र की टीम अपने सबसे अनुभवी बल्लेबाज वी.वी.एस. लक्ष्मण के बगैर उतरेगी, हालांकि सलामी बल्लेबाज मुरली विजय की वापसी से उसे काफी सहारा मिलेगा। मुरली युवा बल्लेबाज अभिनव मुकुंद का स्थान लेंगे।
गेंदबाजी में दक्षिण क्षेत्र को लक्ष्मीपति बालाजी के नहीं रहने से नुकसान उठाना पड़ सकता है। रोबिन डीसूजा इस मैच के लिए बालाजी का स्थान लेंगे, जो इन दिनों राष्ट्रीय टीम के साथ श्रीलंका में हैं। इसके अलावा शांताकुमारन श्रीसंत और लेग स्पिनर मिरुपुरी सुरेश को अहम भूमिका निभानी होगी।
दूसरी ओर, पश्चिम क्षेत्र की टीम भी इस मैच में अपने कई महत्वपूर्ण खिलाड़ियों के बगैर उतरेगी। यूसुफ पठान, रवींद्र जडेजा और जहीर खान अगर उसे अपनी सेवाएं दे पाते को उसका पलड़ा निश्चित तौर पर भारी होता लेकिन ये खिलाड़ी राष्ट्रीय टीम को अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
चितेश्वर पुजारा और अंजिक्य रेहाने जैसे सफल बल्लेबाजों के रहते हालांकि पश्चिम को बल्लेबाजी के लिए चिंता करने की जरूरत नहीं। इसके अलावा कप्तान वसीम जाफर और विकेटकीपर बल्लेबाज पार्थिव पटेल भी शानदार फार्म में हैं।
गेंदबाजी में बाएं हाथ के स्पिनर राजेश पवार अच्छी लय में हैं। पूर्वी क्षेत्र के खिलाफ हुए सेमीफाइनल मुकाबले में राजेश ने आठ विकेट लिए थे।
पश्चिम क्षेत्र ने इस खिताब पर 13 बार कब्जा किया है, हालांकि 2005-06 के बाद उसे सफलता नहीं मिली है। दूसरी ओर, दक्षिण क्षेत्र ने 12 बार यह खिताब जीता है। उसने आखिरी बार 1995-96 सत्र में इस ट्रॉफी पर कब्जा किया था।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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