राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में गिल ने कहा कि इस योजना के अंतर्गत वे खिलाड़ी जो भारत के नागरिक हैं तथा जिन्होंने ओलंपिक, विश्व कप, विश्व चैम्पियनशिप, एशियाई खेलों, राष्ट्रमंडल खेलों तथा पैरालंपिक खेलों में स्वर्ण, रजत अथवा कांस्य पदक जीते हैं और जो रिटायर हो चुके हैं, पेंशन के हकदार हैं।
खेल मंत्री के मुताबिक जुलाई 2008 से पेंशन की दरें संशोधित कर दी गई हैं। संशोधित दरें निम्नलिखित हैं-
ओलंपिक खेलों में पदक विजेता को 10,000 रुपये प्रतिमाह, ओलंपिक और एशियाई खेल, विश्व कप, विश्व चैम्पियनशिप में स्वर्ण पदक विजेता को 8,000 रु प्रतिमाह, ओलंपिक और एशियाई खेल, विश्व कप, विश्व चैम्पियनशिप में रजत व कांस्य पदक विजेता को 7,000 रुपये प्रतिमाह मिलेंगे।
इसी तरह राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक विजेता को 7,000 रुपये प्रतिमाह, एशियाई-राष्ट्रमंडल खेलों में रजत व कांस्य पदक विजेता को 6,000 रुपये प्रतिमाह, पैरालम्पिक खेलों में स्वर्ण पदक विजेता को 5,000 रुपये प्रतिमाह, पैरालंपिक खेलों में रजत पदक विजेता को 4,000 रुपये प्रतिमाह, पैरालम्पिक खेलों में कांस्य पदक विजेता को 3000 रुपये प्रतिमाह दिए जाएंगे।
फिलहाल योजना के अंतर्गत 489 खिलाड़ी पेंशन प्राप्त कर रहे हैं। योजना के अंतर्गत पेंशन के लिए 33 खिलाड़ियों के आवेदन फिलहाल लंबित हैं। 33 में से 29 आवेदनों का सत्यापन किया जा चुका है। जल्द ही इन्हें अंतिम रूप दे दिया जाएगा।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।