न्यूजीलैंड ने 2007 में दक्षिण अफ्रीका में खेले गए ट्वेंटी-20 विश्व कप में भी भारतीय टीम को पटखनी दी थी। दोनों टीमों के बीच अब तक दो मुकाबले खेले गए हैं, जिनमें कीवियों की जीत हुई है। विश्व कप में भारत को केवल न्यूजीलैंड से ही हार झेलनी पड़ी थी।
स्थानीय एएमआई स्टेडियम में बुधवार को भारत पर सात विकेट से जीत हासिल करते हुए न्यूजीलैंड ने एक बार फिर साबित कर दिया कि विपक्षी टीम चाहें कितनी ही रसूख वाली क्यों न हो, उसके घर में उसे हराना कतई आसान नहीं।
यह नहीं भूलना चाहिए कि भारतीय टीम मौजूदा ट्वेंटी-20 चैंपियन है। अपने अंतिम ट्वेंटी-20 मैच में भारत ने श्रीलंका को जिस तरह पराजित किया था, उससे तो यही लगा था कि क्रिकेट के सबसे संक्षिप्त संस्करण में उसका कोई सानी ही नहीं, लेकिन कीवियों ने इसे झुठला दिया।
न्यूजीलैंड ने खेल के हर विभाग में भारत को दोयम साबित किया। कप्तान डेनियल विटोरी का टॉस जीतने के बाद पहले क्षेत्ररक्षण करने का फैसला यह साबित करता है कि उन्हें गेंदबाजों से ज्यादा अपने बल्लेबाजों पर भरोसा है।
विटोरी की सोच बिल्कुल सही थी। अपने कप्तान की उम्मीदों पर खरा उतरते हुए न्यूजीलैंड के बल्लेबाजों ने 163 रनों के लक्ष्य को सात गेंदें शेष रहते हासिल कर लिया। हालांकि गेंदबाजों ने भी कप्तान के भरोसे पर खरा उतरते हुए भारतीय टीम को निर्धारित 20 ओवरों में 162 रनों पर सीमित कर दिया।
बल्लेबाजी की बारी आई तो भारत के लिए सबसे बड़े खतरे के रूप में चिन्हित किए गए विकेटकीपर बल्लेबाज ब्रेंडन मैक्लम ने एक बार फिर साबित कर दिया कि आज की तारीख में वह ट्वेंटी-20 क्रिकेट के बेहतरीन बल्लेबाज हैं।
जेस राइडर (1) के साथ पारी की शुरुआत करने आए मैक्लम 56 रनों की सुलझी हुई पारी खेलकर जैकब ओरम (29) के साथ नाबाद लौटे। मैक्लम ने अपनी 49 गेदों की पारी में दो चौके और तीन छक्के लगाए। ओरम ने 26 गेंदों का सामना करते हुए तीन चौके और दो छक्के जड़े और चोट से उबरने के बाद शानदार वापसी की।
इसके अलावा मार्क गुपटिल और रॉस टेलर ने भी उपयोगी पारियां खेलीं। टेलर ने 20 गेंदों पर 1 चौके और 3 छक्कों की मदद से 31 रन तथा गुपटिल ने 28 गेंदों पर 4 चौकोंऔर 3 छक्कों की मदद से 41 रनों का योगदान दिया।
इससे पहले, सुरेश रैना (नाबाद 61) की बेहतरीन बल्लेबाजी की बदौलत भारत ने निर्धारित 20 ओवरों में आठ विकेट पर 162 रन बनाए। भारत का कुल योग और सम्मानजनक हो सकता था लेकिन टॉस हारने के बाद पहले बल्लेबाजी करते हुए वह वीरेंद्र सहवाग (26 रन, 10 गेंद, 4 छक्के) द्वारा की गई तेज शुरुआत को भुना नहीं सका।
तेजी से रन बनाने के प्रयास में एक छोर पर बल्लेबाज लगातार अपने विकेट गंवाते रहे लेकिन दूसरे छोर पर रैना टिके रहे और स्कोर को अपेक्षाकृत सम्मानजनक स्थिति में पहुंचाकर ही दम लिया। रैना ने अपनी 43 गेंदों की पारी में दो चौके और पांच छक्के लगाए।
इसके अलावा यूसुफ पठान (20 रन, 8 गेंद, 3 छक्के), इरफान पठान (12 रन, 14 गेंद, 1 चौका) और हरभजन सिंह (21 रन, 21 गेंद, 2 चौके) ने महत्वपूर्ण योगदान दिया। इस मैच में सबसे बड़ी साझेदारी रैना और हरभजन के बीच हुई। 101 रनों के कुल योग पर इरफान का विकेट गिरने के बाद बल्लेबाजी के लिए आए हरभजन ने चतुराई के साथ खेलते हुए रैना के साथ 61 रन जोड़े।
भारत ने अपना पहला विकेट सलामी बल्लेबाज गौतम गंभीर (6) के रूप में गंवाया। गंभीर और सहवाग ने 1.2 ओवर में ही टीम का स्कोर 25 रन पर पहुंचा दिया था लेकिन लय में नहीं होने के कारण गंभीर इयान ओ' ब्रायन की गेंद पर बोल्ड हो गए। इसके बाद सहवाग ने रैना के साथ टीम का कुल योग 3.2 ओवर में ही 32 रन पर पहुंचा दिया। लेकिन 10 गेंदों पर चार छक्कों की मदद से 26 रन बनाने के बाद वह ओ' ब्रायन द्वारा बोल्ड कर दिए गए।
रोहित शर्मा (7), युवराज सिंह (1) और कप्तान महेंद्र सिंह धोनी (2) कुछ खास नहीं कर सके। यूसुफ ने हालांकि खुलकर हाथ दिखाए और आठ गेंदों पर तीन छक्कों की मदद से 20 रन बनाए लेकिन वह भी बड़ी पारी खेलने में नाकाम रहे। न्यूजीलैंड की ओर से ब्रायन और इयान बटलर ने दो-दो विकेट लिए जबकि टिम साउथी, विटोरी, नेथन मैक्लम और राइडर को एक-एक सफलता मिली।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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