भारतीय टीम ने 1976 के बाद से न्यूजीलैंड में एक भी टेस्ट मैच नहीं जीता है। भारतीय टीम ने 2002 में जो टेस्ट श्रृंखला कीवियों की धरती पर खेली थी, उसमें उसे 0-2 से हार झेलनी पड़ी थी।
अब जबकि महेंद्र सिंह धौनी की टीम न्यूजीलैंड में पहली बार एकदिवसीय श्रृंखला जीतने का कारनामा कर चुकी है, उसे तीन टेस्ट मैचों की श्रृंखला भी अपने नाम करने में दिक्कत नहीं आनी चाहिए।
भारतीय टीम के सबसे अनुभवी खिलाड़ी सचिन तेंदुलकर ने भी अपनी टीम को कीवियों की धरती पर जीतते नहीं देखा है। तेंदुलकर ने अपनी टीम के साथ न्यूजीलैंड में अब तक सात टेस्ट मैच खेले हैं, जिनमें से एक में भी वह अपनी टीम को जीतते नहीं देख सके हैं।
सिडन पार्क में भारत का रिकार्ड अच्छा नहीं रहा है। 2002 में खेली गई श्रृंखला के दौरान यहां जो मैच खेला गया था, उसमें भारतीय टीम दो पारियों में 99 और 154 रन बना सकी थी। उसे वह टेस्ट चार विकेट से गंवाना पड़ा था।
आंकड़े भले ही भारतीय टीम के पक्ष में नहीं हों लेकिन मौजूदा टीम इतिहास बदलने की क्षमता रखती है। धौनी के नेतृत्व में इस टीम ने पिछले कई मौकों पर इस बात को साबित भी किया है।
एकदिवसीय श्रृंखला में मिली जीत से धौनी के साथियों का मनोबल निश्चित तौर पर सातवें आसमान पर होगा लेकिन यह नहीं भूलना चाहिए कि टेस्ट मैच और एकदिवसीय क्रिकेट में खेल की शैली और रणनीति बिल्कुल बदल जाती है।
धौनी जिस तरह के कप्तान के तौर पर उभरे हैं, उससे तो यही लगता है कि उन्हें इस बात का पूरा आभास होगा कि एकदिवसीय मैचों की जीत की खुमारी भुलाकर खुद को पांच दिवसीय मैचों के लिए तैयार करना सबसे अधिक जरूरी है।
मैच की पूर्व संध्या पर भारतीय कप्तान ने कहा, "हम इतिहास की ओर नहीं देखते। मैं आंकड़ों पर यकीन नहीं करता और न ही उनमें उलझना चाहता हूं। हमारा लक्ष्य जीत है और हम इसके लिए ही खेलेंगे।"
दूसरी ओर, न्यूजीलैंड को इस बात का संतोष होगा कि उसने पिछले दौरे में सीमरों की मददगार पिचों पर भारतीय बल्लेबाजी क्रम की कमजोरियों को उजागर किया था।
सिडन पार्क की पिच पर गेंद के बहुत अधिक घूमने के आसार नहीं हैं लेकिन कुल मिलाकर यहां तेज गेंदबाजों को अपेक्षित मदद मिलने के आसार दिख रहे हैं।
कीवी कप्तान डेनियल विटोरी ने कहा, "हमें आशा है कि इस पिच पर हमारे तेज गेंदबाजों को अपेक्षित मदद मिलेगी। हमारे गेंदबाज भारतीयों से अधिक इस पिच का दोहन कर सकेंगे।"
विटोरी को यह नहीं भूलना चाहिए कि भारतीय टीम की आक्रमण की जिम्मेदारी जहीर खान और ईशांत शर्मा के हाथों में है, जिन्होंने भारत की सपाट पिचों पर आस्ट्रेलिया को मुंह की खाने पर मजबूर कर दिया था। अगर सिडन पार्क की पिच ने उन्हें थोड़ी भी मदद पहुंचाई तो फिर न्यूजीलैंड के बल्लेबाजों के लिए मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं।
भारत का बल्लेबाजी क्रम न्यूजीलैंड की तुलना में अधिक परिपक्व और अनुभवी है। उसके पास राहुल द्रविड़, वी.वी.एस. लक्ष्मण और तेंदुलकर जैसे मंजे हुए बल्लेबाज हैं, जो इस श्रृंखला को भारत के पक्ष में करने के लिए अपना पूरा दमखम झोंक देंगे।
वीरेंद्र सहवाग के फार्म को लेकर कीवी कैंप में सबसे अधिक चिंता है और फिर मेजबान टीम के घावों को हरा करने के लिए गौतम गंभीर और युवराज सिंह भी अहम किरदार निभा सकते हैं। इसके अलावा कप्तान धौनी की नपी-तुली भूमिका भी काफी कारगर साबित हो सकती है।
न्यूजीलैंड की टीम में कई नए खिलाड़ी हैं। ब्रेंट अर्नेल और मार्टिन गुपटिल ने अभी तक एक भी टेस्ट मैच नहीं खेला है जबकि जेम्स फ्रेंकलिन और क्रिस मार्टिन लंबे समय बाद टीम में वापसी कर रहे हैं। जाहिर तौर पर सबसे अनुभवी होने के लिहाज से मार्टिन ही मेजबान आक्रमण पंक्ति की अगुआई करेंगे।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।