तीसरे दिन जब भारतीय टीम ने दूसरे दिन के 4 विकेट पर 278 रनों के स्कोर से आगे अपनी पारी शुरू की तो मानो तेंदुलकर एक और शतक जड़ने की ठान कर आए थे। ऐसा हुआ भी। तीसरे दिन भारतीय टीम को युवराज सिंह के रूप में पहला झटका जल्द ही लगा। युवराज 22 रन बनाकर आउट हुए। इसके बाद तेंदुलकर ने मैदान के चारों ओर आकर्षक शॉट खेलते हुए 260 गेंदों पर 160 रनों की एक यादगार पारी खेली।
भारतीय टीम के इस मास्टर बल्लेबाज की यह पारी कई मायनों में अहम रही। उन्होंने अपनी इस शतकीय पारी में गेंद को 26 बार सीमा रेखा के पार पहुंचाया। यह कीवी सरजमीं पर उनका दूसरा और उनके करियर का 42वां शतक था। इससे पहले 1998 में वेलिंग्टन में 113 रनों की पारी खेली थी। खास बात यह भी है कि सचिन के टेस्ट करियर में यह 18वां ऐसा शतक था जिसमें उन्होंने अपने व्यक्तिगत स्कोर को 150 रनों के पार पहुंचाया।
तेंदुलकर के अलावा जहीर ने भी तीसरे दिन अपनी बल्लेबाजी का जलवा बिखेरा। उन्होंने 46 गेंदों का सामना करते हुए धुंआधार 51 रनों की नाबाद पारी खेली। कप्तान महेंद्र सिंह धौनी ने भी 47 रन बनाए। खेल के दूसरे दिन गौतम गंभीर ने 72 और राहुल द्रविड़ ने 66 रनों की पारी खेली थी। भारतीय टीम पहली पारी में 520 रन बनाने में कामयाब रही।
न्यूजीलैंड की ओर से क्रिस मार्टिन और इयान ओ'ब्रायन ने तीन-तीन विकेट और कप्तान डेनियल विटोरी ने दो विकेट झटके। कीवी टीम ने अपनी पहली पारी में विटोरी और जेस राइडर के शतकों की बदौलत 279 रन बनाए थे।
कीवी टीम ने दूसरी पारी में शून्य के स्कोर पर ही टिम मैकलोंटॉस के रूप में अपना पहला विकेट खो दिया। उन्हें जहीर ने तेंदुलकर के हाथों लपकवाया। इसके बााद हरभजन सिंह ने मार्टिन गुपटिल और मुनाफ पटेल ने नाइट वाचमैन की भूमिका में आए काइल मिल्स को पेवेलियन की राह दिखाई। पहली पारी के स्कोर के आधार पर भारत के पास अभी भी 166 रनों की बढ़त है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।