चौथे दिन भारत को जीत के लिए 39 रनों का लक्ष्य मिला था, जिसे 5.2 ओवरों में हासिल कर लिया गया। गौतम गंभीर ने महज 18 गेंदों पर 30 और राहुल द्रविड़ ने आठ रन बनाए। इससे पहले खेल के चौथे दिन ब्रैंडन मैक्कलम के 84 रनों की बदौलत कीवी टीम ने दूसरी पारी में 279 रन बना सकी। हरभजन सिंह ने 63 रन देकर छह विकेट झटके। उनके अलावा मुनाफ पटेल ने दो और जहीर खान व युवराज सिंह ने एक-एक विकेट अपने नाम किए। पहली पारी में शानदार शतक लगाने के लिए तेंदुलकर को मैन ऑफ द मैच चुना गया।
तीसरे दिन के तीन विकेट पर 75 रन से आगे खेलते हुए न्यूजीलैंड की टीम को हरभजन सिंह ने मुश्किल में डाल दिया। उनके आगे डेनियल फ्लाइन और मैक्कलम को छोड़ सभी कीवी बल्लेबाज लाचार नजर आए। फ्लाइन ने हरभजन की एक गेंद पर पेवेलियन का रुख करने से पहले 67 रनों की पारी खेली। हरभजन सिंह के लिए 23वां मौका था जब उन्होंने टेस्ट मैच की एक पारी में पांच या उससे ज्यादा विकेट अपने नाम किए।
न्यूजीलैंड की दूसरी पारी के दौरान एक समय 199 रनों के स्कोर पर कीवी टीम के आठ खिलाड़ी पेवेलियन लौट गए थे। इसके बाद मैक्कलम ने सूझबूझ से खेलना शुरू किया और इयान ओ'ब्रायन के साथ मिलकर नौंवे विकेट के लिए 76 रनों की साझेदारी की। इन दोनों की जोड़ी को तोड़ने के लिए भारतीय टीम को काफी मशक्कत करनी पड़ी। आखिरकार हरभजन ने ओ'ब्रायन का विकेट झटक कर भारतीय टीम की जीत की बुनियाद रख दी। युवराज की एक गेंद पर मैक्कलम भी आउट हो गए और न्यूजीलैंड की दूसरी पारी 279 रनों पर सिमट गई।
इससे पहले भारतीय टीम ने पहली पारी में तेंदुलकर के शानदार 160 रनों की बदौलत 520 रन बनाए थे। मैच के तीसरे दिन का खेल तेंदुलकर के नाम था। उन्होंने मैदान के चारों ओर आकर्षक शॉट खेलते हुए 160 रन बनाए थे। अपनी इस शतकीय पारी में सचिन ने गेंद को 26 बार सीमा रेखा के पार पहुंचाया था। यह कीवी सरजमीं पर उनका दूसरा और उनके करियर का 42वां शतक था।
तेंदुलकर के अलावा जहीर ने भी तीसरे दिन अपनी बल्लेबाजी का जलवा बिखेरा था। उन्होंने 46 गेंदों का सामना करते हुए धुंआधार 51 रनों की नाबाद पारी खेली थी। कप्तान महेंद्र सिंह धौनी ने भी 47 रन बनाए थे। खेल के दूसरे दिन गौतम गंभीर ने 72 और राहुल द्रविड़ ने 66 रनों की पारी खेली थी।
कीवी टीम ने अपनी पहली पारी में कप्तान डेनियल विटोरी और जेस राइडर के शतकों की बदौलत 279 रनों का स्कोर खड़ा किया था।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।