बीसीसीआई ने रविवार को आयोजित अपनी आपात बैठक के दौरान सुरक्षा कारणों के चलते आईपीएल का दूसरा संस्करण देश से बाहर आयोजित कराने का फैसला किया।
बीसीसीआई ने साफ किया कि वह मजबूरन यह फैसला कर रहा है क्योंकि सरकार लोकसभा चुनावों के साथ-साथ होने वाले आईपीएल मैचों के लिए सुरक्षा की व्यवस्था करने में असमर्थता जता रही है।
बीसीसीआई अध्यक्ष शशांक मनोहर ने कहा, "इससे पहले, महाराष्ट्र और आंध्र प्रदेश की सरकारों ने कहा था कि उन्हें आईपीएल मैचों की मेजबानी करने में कोई दिक्कत नहीं है लेकिन एक दिन बाद ही उन्होंने कहा कि वे इन मैचों के लिए सुरक्षा प्रदान करने की स्थिति में नहीं हैं।"
मनोहर ने कहा कि सरकार की बेरुखी से तंग आकर बीसीसीआई को आईपीएल का आयोजन देश से बाहर कराने का फैसला करना पड़ रहा है।
उन्होंने कहा, "हम बाध्य होकर आईपीएल का आयोजन विदेशी धरती पर कराने का फैसला कर रहे हैं। हम खासतौर पर महाराष्ट्र और आंध्र प्रदेश की सरकारों के रुख से खफा हैं।"
उन्होंने पत्रकारों से कहा, "कई देशों के क्रिकेट बोर्डो ने आईपीएल की मेजबानी की इच्छा जाहिर की है। हम सबके साथ बात कर रहे हैं।"
आईपीएल आयोजन समिति के अध्यक्ष ललित मोदी ने कहा कि आयोजन स्थलों में परिवर्तन के अलावा इसके प्रारूप में कोई और परिवर्तन नहीं किया जाएगा।
बकौल मोदी, "आईपीएल के 59 मैच भारतीय समयानुसार शाम चार बजे से रात 11 बजे तक खेले जाएंगे। इसके समय और प्रारूप में किसी तरह का परिवर्तन नहीं किया जा सकता है। टूर्नामेंट का नया कार्यक्रम शीघ्र ही जारी किया जाएगा।"
उधर, इंग्लैंड व वेल्स क्रिकेट बोर्ड (ईसीबी) ने कहा है कि अब जबकि यह साफ हो गया है कि आईपीएल का आयोजन भारत के बाहर होगा, वह इस प्रतिष्ठित ट्वेंटी-20 टूर्नामेंट की मेजबानी के लिए सहर्ष तैयार है।
ईसीबी प्रमुख जाइल्स क्लार्क ने ब्रिटेन के समाचार पत्र 'द टेलीग्राफ' से बातचीत के दौरान कहा, "बीसीसीआई के साथ हमारे रिश्ते काफी अच्छे हैं। अगर बीसीसीआई को इस मामले में हमसे कोई मदद चाहिए होगी तो हम इसके लिए पूरी तरह तैयार हैं।"
उधर, क्रिकेट साउथ अफ्रीका (सीएसए) ने भी साफ कर दिया है कि आईपीएल आयोजन समिति ने इस प्रतियोगिता के आयोजन के संबंध में उससे संपर्क किया है।
सीएसए के मुख्य कार्यकारी अधिकारी जेराल्ड मजोला ने कहा, "बीसीसीआई ने रविवार सुबह ही हमसे आधिकारिक तौर पर संपर्क किया है। उसने बताया कि वह हमें आईपीएल के संभावित मेजबान के रूप में देख रहा है। मैंने कहा कि हम इस काम में उसकी मदद करने को तैयार हैं।"
इसी बीच, अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) ने बीसीसीआई के आईपीएल ट्वेंटी-20 प्रतियोगिता का आयोजन भारत के बाहर कराने के फैसले पर हैरानी जताई है।
आईसीसी के प्रमुख डेविड मोर्गन ने कहा कि वह बीसीसीआई के इस फैसले से खासे चकित हैं।
बकौल मोर्गन, "यह मेरे लिए चौंकाने वाला फैसला है। मैं समझ सकता हूं कि चुनावों को लेकर आईपीएल आयोजन समिति को सचमुच काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था।"
इधर, आईपीएल की आयोजन समिति ने टूर्नामेंट की फ्रेंचाइजी टीमों के मालिकों को इस बात का भरोसा दिया है कि इसका आयोजन विदेश में कराने की स्थिति में भी उन्हें नुकसान नहीं होने दिया जाएगा।
आईपीएल की फ्रेंचाइजी टीम-मुंबई इंडियंस का मालिकाना हक रखने वाली कंपनी रिलायंस के कर्ताधर्ता मुकेश अंबानी की पत्नी और टीम की अध्यक्ष नीता अंबानी ने आईपीएल के आयोजन को लेकर बीसीसीआई द्वारा बुलाई गई आपात बैठक के बाद पत्रकारों को संबोधित करते हुए यह बात कही।
नीता ने कहा, "आईपीएल को भारत के बाहर कराने का फैसला हमारे पक्ष में नहीं है लेकिन आईपीएल ने कहा है कि इस कारण किसी फ्रेंचाइजी टीमों को नुकसान नहीं उठाने दिया जाएगा।"
बहरहाल, इस घोषणा के साथ ही आईपीएल को लेकर राजनीति भी आरंभ हो गई। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने इस मामले को लेकर अड़ियल रवैया अपनाने के लिए सरकार की भूमिका की आलोचना की है वहीं दूसरी ओर अन्य राजनीतिक पार्टियों ने इसे लेकर खुशी जाहिर की है।
भाजपा के वरिष्ठ नेता और दिल्ली एवं जिला क्रिकेट बोर्ड (डीडीसीए) के अध्यक्ष अरुण जेटली ने पत्रकारों से बातचीत में कहा, "सरकार के रवैये के कारण आईपीएल आयोजन समिति ने इस प्रतियोगिता को भारत के बाहर कराने का फैसला किया है। इससे अच्छा संकेत नहीं जाएगा और पाकिस्तान की तरह भारत को भी असुरक्षित खेल आयोजन स्थल समझा जाने लगेगा। जेटली के मुताबिक सरकार ने राष्ट्रहित में फैसला नहीं किया।"
कांग्रेस प्रवक्ता जयंती नटराजन ने कहा कि आईपीएल निजी आयोजकों द्वारा कराया जाने वाला एक निजी टूर्नामेंट है, लिहाजा इसे देश में या देश के बाहर कराने का फैसला वही कर सकते हैं। बकौल नटराजन, "आईपीएल एक निजी आयोजन है। इसके आयोजकों को अपने फैसले लेने का हक है। इस संबंध में मैं कोई विचार नहीं रख सकती।"
राष्ट्रीय जनता दल (राजद) अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव ने इस मामले में कांग्रेस का पक्ष लेते हुए कहा कि उन्हें नहीं लगता कि कांग्रेस पार्टी जानबूझकर लोकसभा चुनावों के दौरान आईपीएल का आयोजन होने नहीं देना चाहती।
जनता दल-युनाइटेड (जदयू) के अध्यक्ष शरद यादव के विचार हालांकि लालू से बिल्कुल भिन्न हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ने आईपीएल आयोजन समिति को पहले ही कह दिया था कि चुनाव के दौरान मैचों के लिए सुरक्षा मुहैया करा पाना उसके लिए संभव नहीं होगा। बकौल यादव, "ऐसे समय में जबकि करोडो़ं भारतीयों की किस्मत का फैसला हो रहा हो, मतदाताओं की सुरक्षा से बड़ी और कोई चीज हो ही नहीं सकती।"
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई) के नेता डी. राजा ने कहा, "इस समय हम चुनाव की तैयारियों में जुटे हैं। गृह मंत्रालय ने आईपीएल आयोजन समिति को अपनी दिक्कतों से अवगत करा दिया था लेकिन जब कोई रास्ता नहीं निकला तो अपने हित में आईपीएल आयोजन समिति ने आयोजन स्थल बदलने का फैसला किया।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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