इसका कारण यह है कि 10 अप्रैल से होने वाले इस प्रतिष्ठित ट्वेंटी-20 टूर्नामेंट से पहले और इसके दौरान इंग्लैंड में कई अन्य महत्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय आयोजन होने हैं। मसलन, आईपीएल के आयोजन के एक सप्ताह पहले लंदन में जी-20 देशों का सम्मेलन होना है, जिसके लिए अभूतपूर्व सुरक्षा की व्यवस्था की जा रही है।
जी-20 सम्मेलन के कारण लंदन और खासकर ब्रिटेन के अग्रणी सुरक्षाबलों की छुट्टियां फिलहाल रद्द कर दी गई हैं क्योंकि इस सम्मेलन के दौरान आतंकी हमले की आशंका जताई गई है।
इसके अतिरिक्त फेडरेशन कप (एफए कप) फुटबाल टूर्नामेंट के सेमीफाइनल और लंदन मैराथन का आयोजन भी आईपीए के 45 दिवसीय आयोजन के दौरान ही होना है। इस लिहाज से इंग्लैंड में पुख्ता सुरक्षा व्यवस्था हासिल करना आईपीएल आयोजन समिति को काफी महंगा पड़ सकता है।
आईपीएल कमिश्नर ललित मोदी ने मौसम के अलावा महंगी सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी लंदन की मेजबानी की दावेदारी को कमजोर बताया है। मोदी को आभास है कि सुरक्षा को लेकर जो राशि लंदन पुलिस खर्च करेगी, उसका भुगतान आईपीएल आयोजन समिति को ही करना होगा। जाहिर तौर पर यह राशि आईपीएल के लिए काफी बड़ी है।
ब्रिटेन के समाचार पत्र 'द टाइम्स' ने लंदन के वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारियों के हवाले से लिखा है कि आईपीएल के आयोजन में इतना कम समय रह गया है कि सुरक्षा की पुख्ता व्यवस्था कर पाना संभव नहीं है।
पत्र ने एक अधिकारी के हवाले से लिखा है, "हमसे अभी तक इस संबंध में संपर्क नहीं किया गया है। अगर हमसे संपर्क किया भी जाता है तो हम स्थिति साफ कर देना चाहेंगे। श्रीलंकाई खिलाड़ियों पर हुए हालिया आतंकवादी हमले को देखते हुए आईपीएल के दौरान बेहद पुख्ता सुरक्षा व्यवस्था करनी होगी और हमारे पास इसके लिए बिल्कुल भी समय नहीं बचा है।"
ऐसे में आईपीएल के आयोजन के लिए सबसे उपयुक्त मेजबान देश दक्षिण अफ्रीका ही नजर आ रहा है। इसी को देखते हुए मोदी अपने कार्यक्रम में बदलाव करते हुए दक्षिण अफ्रीका के लिए रवाना हो चुके हैं। दक्षिण अफ्रीका से पहले मोदी को लंदन जाना था लेकिन मौके की नजाकत को भांपते हुए उन्होंने पहले दक्षिण अफ्रीका जाने का फैसला किया।
वैसे दक्षिण अफ्रीकी आयोजन स्थलों का मुआयना करने के बाद वह लंदन होते हुए भारत लौटेंगे लेकिन कुल मिलाकर जो तस्वीर सामने आ रही है, उसके मुताबिक महंगी सुरक्षा व्यवस्था और मैचों के दौरान मौसम की मार की आशंका को देखते हुए फिलहाल मेजबान के रूप में लंदन की दावेदारी काफी कमजोर नजर आ रही है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।