नई दिल्ली, 5 अप्रैल (आईएएनएस)। ओलंपिक खेलों में देश को अधिक से अधिक पदक दिलाने के मकसद से शुरू किया गया भारतीय सेना का खेलों से जुड़ी प्रतिभा तलाशने का महत्वाकांक्षी कार्यक्रम 'मिशन ओलंपिक्स' बंद कर दिया गया है।
सेना ने 2005 में बड़े जोर-शोर के साथ यह कार्यक्रम शुरू किया था। सेना का यह प्रयास मेजर राज्यवर्धन सिंह राठौर द्वारा एथेंस ओलंपिक में रजत पदक जीतने की सफलता के बाद सामने आया था लेकिन आज शीर्ष सैन्य अधिकारियों के आदेश के बाद इसे समाप्त कर दिया गया है।
शीर्ष अधिकारियों के आदेश के बाद उन 23 खिलाड़ियों का भविष्य अंधकारमय हो गया है जो सेना के कार्यक्रम के तहत प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं।
सेना के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम जाहिर नहीं होने देने की शर्त पर आईएएनएस को बताया, "हमारे शीर्ष अधिकारियों को लगा कि यह कार्यक्रम अपेक्षित परिणाम देने में नाकाम रहा है, लिहाजा उन्होंने इसे बंद करने का आदेश दे दिया।"
सेना ने इस कार्यक्रम के अंतर्गत लगभग पांच करोड़ रुपये खर्च किए और इसके लिए पुणे में आर्मी स्पोर्ट्स इंस्टीट्यूट भी स्थापित किया गया।
पूर्व खिलाड़ियों का मानना है कि इस तरह के कार्यक्रम का आकलन करने के लिए कुछ और समय देने चाहिए थे। सेना ने जितनी अवधि में इस कार्यक्रम की सफलता-असफलता का आकलन किया वह पर्याप्त नहीं है।
राष्ट्रीय स्तर के पूर्व बैडमिंटन खिलाड़ी और वर्तमान में कोच की भूमिका निभा रहे विमल कुमार ने आईएएनएस से कहा कि अगर आप ओलंपिक्स में परिणाम की बात करें तो इसके लिए कम से कम 10 वर्ष का समय चाहिए।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।