नई दिल्ली, 7 अप्रैल (आईएएनएस)। भारतीय क्रिकेट टीम का न्यूजीलैंड दौरा पूर्व कप्तान राहुल द्रविड़ के करियर के लिए संजीवनी जैसा साबित हुआ। इस दौरे में द्रविड़ ने न सिर्फ ढेरों रन बटोरे बल्कि वह आत्मविश्वास भी हासिल करने में सफल रहे, जिसके लिए उन्हें भारतीय क्रिकेट का 'मिस्टर भरोसेमंद' और 'दीवार' कहा जाता है।
न्यूजीलैंड दौरे से पहले खेली गई 11 पारियों में द्रविड़ सिर्फ एक शतक (136 रन, इंग्लैंड के खिलाफ) लगा सके थे लेकिन न्यूजीलैंड में उनके बल्ले से तीन मैचों की छह पारियों में 314 रन निकले। द्रविड़ ने एक बार नाबाद रहते हुए 62.83 के औसत से रन बटोरे। इसमें चार अर्धशतक शामिल हैं।
द्रविड़ ने हेमिल्टन टेस्ट की दो पारियों में 66 और नाबाद 8 रन बनाए। नेपियर टेस्ट की पहली पारी में वह 83 रन बनाने के बावजूद शतक से चूक गए लेकिन दूसरी पारी में उनकी 62 रनों की बेशकीमती पारी ने भारत को हार की गिरफ्त से बाहर निकालने का काम किया।
वेलिंग्टन में खेले गए तीसरे टेस्ट मैच की पहली पारी में द्रविड़ 35 रन पर दुर्भाग्यपूर्ण ढंग से आउट करार दिए गए थे लेकिन दूसरी पारी में उन्होंने 60 रन बनाकर भारत को मजबूत आधार दिया। उनकी सभी पारियां टीम के लिए बहुत उपयोगी साबित हुई क्योंकि इस दौरान उन्होंने अपने साथियों के साथ कई बार शतकीय साझेदारियां निभाईं।
इसके अलावा द्रविड़ इस श्रृंखला के दौरान टेस्ट मैचों में सबसे अधिक कैच लेने का विश्व रिकार्ड अपने नाम करने में सफल रहे। उन्होंने मार्क वॉ के 181 कैचों के रिकार्ड को पीछे छोड़ते हुए अपने कुल कैचों की संख्या 183 कर ली।
जाहिर तौर पर यह उपलब्धियां द्रविड़ के लिए नई नहीं हैं लेकिन उनके जैसा विश्व स्तरीय बल्लेबाज जब अपने खराब फार्म के कारण टीम से बाहर निकाले जाने के कगार पर पहुंचता है तो उसके सामने साबित करने के लिए काफी कुछ होता है।
द्रविड़ अपने करियर में दूसरी बार अग्निपरीक्षा से गुजरे। उनकी पहली अग्निपरीक्षा भी न्यूजीलैंड में ही हुई थी। 1996 में क्रिकेट शुरू करने वाले द्रविड़ पर जब वर्ष 1999 में यह 'ठप्पा' लगाने का प्रयास किया गया कि वह एकदिवसीय क्रिकेट के लिए फिट नहीं हैं तब उन्होंने न्यूजीलैंड में ही टीम प्रबंधन की इस धारणा को तोड़ा था।
1999 में न्यूजीलैंड में खेले पांच मैचों में द्रविड़ ने 123, 68, 51, 38 और 29 रन बनाए थे। सबसे अहम बात यह थी कि द्रविड़ ने अपनी पारंपरिक शैली से विपरीत जाकर बहुत कम गेंदों में ये पारियां खेली थीं।
न्यूजीलैंड दौरे से पहले यहां तक कहा जा रहा था कि द्रविड़ का चयन टेस्ट टीम में नहीं होगा। टीम में अपनी उपयोगिता साबित करने के लिए उनके सामने इंग्लैंड के खिलाफ घरेलू मैदान पर अच्छा स्कोर खड़ा करने की चुनौती थी।
धुन के पक्के द्रविड़ ने इसे सहर्ष स्वीकार किया और मोहाली में 136 रनों की बेशकीमती पारी खेली। हालांकि इससे पहले वह इंग्लैंड और आस्ट्रेलिया के खिलाफ छह पारियों में बुरी तरह नाकाम रहे थे।
द्रविड़ वीरेंद्र सहवाग या सचिन तेंदुलकर की शैली के बल्लेबाज नहीं हैं और यही कारण है कि उन्हें कई बार एकदिवसीय क्रिकेट के लिहाज से 'अनफिट' घोषित करने की कोशिश की गई लेकिन अपनी ठोस शैली और लगातार रन बनाने की क्षमता के कारण वह पिछले 13 वर्षो से भारतीय टीम के अभिन्न अंग बने हुए हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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