नई दिल्ली, 20 अप्रैल (आईएएनएस)। करीब पांच साल का विवादित कार्यकाल पूरा करने के बाद सोमवार को अवकाश प्राप्त करने वाले मुख्य निर्वाचन आयुक्त एन. गोपालस्वामी का कहना है कि उन्होंने अपने सहयोगी नवीन चावला पर जो आरोप लगाए थे उसके लिए उन्हें कोई अफसोस नहीं है।
गोपालस्वामी ने आईएएनएस से बातचीत में निर्वाचन आयोग की नई टीम को करीब एक माह तक चलने वाले लोकसभा चुनाव की शुभकामना देते हुए कहा कि उनकी योजना राजनीति में प्रवेश करने की नहीं है।
रविवार को गोपालस्वामी की निर्वाचन आयुक्त चावला और एस. वाई. कुरैशी के साथ कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को बेल्जियम की सरकार से मिले सम्मान के मुद्दे पर भिड़ंत हो गई थी। गोपालस्वामी निर्वाचन आयोग से जांच करवाना चाहते थे जिससे सोनिया गांधी को वर्तमान लोकसभा चुनाव लड़ने के अयोग्य ठहराया जा सकता था, लेकिन वह अल्पमत में थे।
चावल के साथ तनाव को लेकर गोपालस्वामी का कार्यकाल हमेशा सुर्खियों में रहा, जो देश में जारी लोकसभा चुनावों के बीच उनकी जगह ले रहे हैं।
राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल से चावला को पद से हटाने की सिफारिश नामंजूर होने और सोनिया गांधी के मामले में उनके सुझाव को सहयोगियों द्वारा खारिज कर दिए जाने के बावजूद उन्होंने कहा, "अपने विचार को उठाने का मुझे कोई अफसोस नहीं है।"
कार्यभार से मुक्त होने के कुछ घंटे पहले आईएएनएस के साथ विस्तृत बातचीत में सन 1966 बैच के गुजरात कैडर के भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी गोपालस्वामी काफी सहज और खुश दिखे।
30 जनू 2006 को कार्यभार संभालने के बाद से लिए गए सबसे कठोर फैसले के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा, "पद छोड़ने की रिपोर्ट पर हस्ताक्षर करना सबसे कठोर चीज थी।" फिर कुछ विराम के बाद उन्होंने कहा कि एक मुख्यमंत्री को उनके फैसलों पर सवाल पूछने के लिए बुलाना काफी कठिन फैसला था। उन्होंने इस बारे में विस्तार से बताने के बजाय सिर्फ इतना ही कहा, "मैंने सिर्फ उनसे इतना ही कहा यह मेरा अंतिम फैसला है।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।