वेबसाइट 'क्रिकइंफो डॉट कॉम' के मुताबिक 37 साल के टिकोलो ने चार दिन पहले ही अपने साथियों से कह दिया था कि वह हॉलैंड के साथ होने वाले आखिरी क्वालीफाईंग मैच के बाद पद छोड़ देंगे।
टिकोलो ने कहा, "सात साल तक अपनी टीम का नेतृत्व करने के बाद मुझे लगा कि अब कप्तानी की जिम्मेदारी किसी युवा कंधे पर देने का वक्त आ गया है। मैं चाहता हूं कि हमारी टीम नए कप्तान के नेतृत्व में पांचवीं बार विश्व कप में हिस्सा ले। अगले विश्व कप तक मैं 40 साल को हो जाऊंगा, इस लिहाज से मेरे लिए कप्तान बने रहना उचित नहीं।"
केन्या के लिए 117 एकदिवसीय मैच खेल चुके टिकोलो ने कहा कि 2003 में अपनी टीम को विश्व कप के सेमीफाइनल में पहुंचाना उनके करियर की सबसे बड़ी उपलब्धि रही है।
वर्ष 1996 में कटक में भारत के खिलाफ अंतर्राष्ट्रीय एकदिवसीय क्रिकेट में पर्दापण करने वाले टिकोलो ने 117 मैचो में 31.19 के औसत से 3213 रन बनाए हैं।
टिकोलो को 2002 में मौरिस ओडुंबे के स्थान पर केन्याई टीम का कप्तान नियुक्त किया गया था। मैच फिक्सिंग के मामले में दोषी पाए जाने के बाद ओडुंबे पर पांच साल का प्रतिबंध लगाया गया था।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।