पाकिस्तान के समाचार पत्र 'द न्यूज' ने मनि के हवाले से लिखा है कि भारत ने जानबूझकर आईसीसी को यह फैसला लेने के लिए बाध्य किया है क्योंकि इसमें उसका स्वार्थ छुपा है। भारत के इस कदम ने पाकिस्तान को अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट बिरादरी में अलग-थलग कर दिया है।
बकौल मनि, "पाकिस्तान से विश्व कप की मेजबानी छीनने का आईसीसी का फैसला बिल्कुल न्याय संगत नहीं है। मैं दावे के साथ कह सकता हू्ं कि आईसीसी को भारत ने ही यह फैसला लेने पर मजबूर किया है। भारत ने एक अच्छे पड़ोसी की भूमिका नहीं निभाई।"
पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार विश्व कप का आयोयन भारत, पाकिस्तान, श्रीलंका और बांग्लादेश की मेजबानी में होना था लेकिन आईसीसी ने पिछले महीने अपनी कार्यकारिणी की बैठक के दौरान पाकिस्तान से मेजबानी का हक छीन लिया था।
आईसीसी का कहना था कि पाकिस्तान में हालात ठीक नहीं हैं, लिहाजा वहां विश्व कप का आयोजन कराना खतरनाक हो सकता है। पाकिस्तान के हिस्से आने वाले 14 मैचों को बाकी बचे तीन मेजबानों-भारत, श्रीलंका और बांग्लादेश के बीच विभाजित कर दिया गया।
मनि ने कहा कि भारत चाहता था कि विश्व कप के सभी मैच उसी की धरती पर खेले जाएं लेकिन वह यह भूल गया था कि विश्व कप की मेजबानी किसी एक देश को नहीं बल्कि चार देशों को संयुक्त रूप से दी गई थी।
मनि ने कहा, "पाकिस्तान से मेजबानी छीने जाने के बाद भारत के हिस्से 49 में से 29 मैच आए हैं। भारत शुरुआत से ही यही चाहता था। आईसीसी को समझना चााहिए कि दूसरे देशों के हितों की अनदेखी हो रही है। यह बिल्कुल अमान्य फैसला है। इससे क्रिकेट बिरादरी में असंतोष फैलेगा।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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