नई दिल्ली, 20 मई (आईएएनएस)। डरबन के किंग्समीड स्टेडियम में बुधवार को कोलकाता नाइट राइर्ड्स के हाथों मिली हार के साथ इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) के दूसरे संस्करण से राजस्थान रॉयल्स टीम बाहर हो गई है। इस तरह कम चर्चित खिलाड़ियों के दम पर बड़े कारनामे करते हुए पिछले साल खिताब पर कब्जा करने वाली इस टीम का खिताब बचाने का सपना टूट गया।
कोलकाता के खिलाफ राजस्थान की टीम ने ठीक वही जीवटता दिखाई, जिसके लिए वह मशहूर रही है। 101 रन के मामूली स्कोर पर सिमटने के बाद भी उसने मैच को 20वें ओवर तक खींचा लेकिन अंतिम समय की कुछ गलतियों ने उसके सेमीफाइनल खेलने के इरादे को ध्वस्त कर दिया।
आईपीएल के पहले संस्करण में राजस्थान ने 14 में से 11 मैचों में जीत के साथ खिताब पर कब्जा किया था। पिछले साल उसे तीन मैचो में हार का सामना करना पड़ा था लेकिन इस बार उसे 14 मैचों में सिर्फ छह जीत मिली। उसे सात मैचों में हार का सामना करना पड़ा जबकि एक मैच का नतीजा नहीं निकला।
जाहिर तौर पर ऐसे प्रदर्शन के बूते कोई टीम खिताब नहीं जीत सकती लेकिन इस टीम की जीवटता, संघर्षशीलता और जीतने की ललक को लेकर सवाल नहीं उठाया जा सकता। इस साल कुछ बातें ऐसी थीं, जो राजस्थान के पक्ष में नहीं थीं लेकिन इसके बावजूद टीम ने खिताबी दौड़ में अंतिम समय तक बने रहने की पूरी कोशिश की।
इस साल राजस्थान के साथ शेन वॉटसन, कामरान अकमल, सोहैल तनवीर और शॉट टेट जैसे विश्व-स्तरीय खिलाड़ी नहीं थे। वॉटसन पिछल्ले आईपीएल में राजस्थान के सबसे सफल बल्लेबाज रहे थे जबकि तनवीर ने पूरे टूर्नामेंट में सर्वाधिक विकेट झटके थे।
बेशक इन चार खिलाड़ियों की कमी राजस्थान के कप्तान शेन वार्न को खली होगी। खासतौर पर तनवीर और वॉटसन की। इन दो प्रमुख खिलाड़ियो की गैरमौजूदगी में वार्न को कई अनचाहे प्रयोग करने पड़े। कई मौकों पर ये प्रयोग सफल रहे तो कुछ अवसरों पर टीम को नुकसान भी उठाना पड़ा।
मध्यक्रम में अकमल की कमी खली और तनवीर के नहीं रहने से गेंदबाजी आक्रमण बिल्कुल कमजोर हो गया। मुनाफ पटेल ने हालांकि इस साल चमकदार प्रदर्शन किया। अमित सिंह ने भी अच्छी गेंदबाजी की लेकिन वॉटसन जैसे उपयोगी खिलाड़ी के नहीं रहने से वार्न की रणनीति बुरी तरह प्रभावित हुई।
पहले संस्करण में यूसुफ पठान, ग्रीम स्मिथ, वॉटसन और जडेजा की चमकदार बल्लेबाजी के बूते राजस्थान की टीम ने 14 मैचों में 2245 रन बटोरे थे जबकि इस बार उसके बल्लेबाज सिर्फ 1688 रन बटोर सके। इस आंकड़े को दूसरी तरफ से देखने से प्रदर्शन में गिरावट का अंतर पता चलता है। राजस्थान के गेंदबाजों ने पिछले साल विपक्षी टीमों को 22245 रनों की तुलना में 2153 रन बनाने दिए थे जबकि इस साल उसकी कमजोर आक्रमण पंक्ति का फायदा उठाकर विपक्षी टीमें 1688 रनो की तुलना में 1810 रन बटोरने में सफल रहीं।
वार्न की सटीक रणनीति, टीम की सह-मालिक शिल्पा शेट्टी की हौसलाअफजाई और यूसुफ पठान जैसे खिलाड़ी के चमकदार खेल के बूते राजस्थान की टीम ने कई मैचों में काफी सराहनीय प्रदर्शन किया और अंत तक सेमीफाइनल की दौड़ में बनी रही लेकिन कई मौकों पर खिलाड़ियों की अनुभवहीनता उसकी राह में रोड़ा बनी।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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