आगरा, 25 मई (आईएएनएस)। इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) की कामयाबी ने ताज नगरी और उसके आसपास के बड़े इलाके को 'फटाफट क्रिकेट' की नर्सरी के रूप में तब्दील कर दिया है। आलम यह है कि गर्मी की छुट्टियों में ट्वेंटी-20 क्रिकेट को ध्यान में रखकर लगाए जा रहे क्रिकेट कैंपों में हजारों बच्चे भविष्य के सपने बुनते दिख रहे हैं।
फार्मूला कार चालक और मशहूर जूता निर्यातक हर विजय सिंह बाहिया ने आईएएनएस को बताया, "सिर्फ आगरा में ऐसे आधे दर्जन कैंप हैं, जहां हजारों बच्चे क्रिकेट के गुर सीख रहे हैं। मैंने भी गुरुवार को एक ऐसा ही एक कैंप शुरू किया। इसमें झुग्गियों में रहने वाले बच्चों को क्रिकेट की बारीकियां सिखाई जा रही हैं।"
बाहिया ने बताया कि छोटे-छोटे बच्चे आईपीएल की सफलता से बेहद उत्साहित हैं। उन्हें लगने लगा है कि क्रिकेट में उनका भी भविष्य छुपा है और इस काम में परिजन भी उनकी भरपूर मदद कर रहे हैं क्योंकि उन्हें भी लगने लगा है कि आने वाले दिनों में आईपीएल के माध्यम से हजारों बच्चे अपना भविष्य संवार सकेंगे।
विकास संबंधी महकमे से जुड़े उत्तर प्रदेश सरकार के कर्मचारी सुभाष झा बताते हैं कि आईपीएल की सफलता के बाद बच्चों में क्रिकेट के प्रति जबरदस्त रुचि पैदा हुई है।
बकौल झा, "अब कोई गिल्ली-डंडा नहीं खेलता। इस इलाके में क्रिकेट की लोकप्रियता आग की तरह फैली है। वीडियो गेम के जरिए क्रिकेट खेलना और कमेंटरी सुनना यहां के युवाओं की आदत में शुमार हो चुका है। यहां तक की हर कोई क्रिकेट ही भाषा बोलता नजर आ रहा है।"
ख्वाजा निशाद हुसैन 1990 से ही सेंट जोंस कॉलेज क्रिकेट कैंप चला रहे हैं। उन्होंने चेतन शर्मा, यशपाल, मनोज प्रभाकर और विजय यादव जैसे अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेटरों को इस खेल के गुर सिखाए हैं।
ख्वाजा ने आईएएनएस को बताया, "आज की तारीख में हमारे कैंप में छह से 15 साल की उम्र के 180 बच्चे हैं। हम इन खिलाड़ियों को अलग-अलग उम्र वर्ग की टीमों में आजमा रहे हैं। मुझे खुशी है कि ये सभी बहुत अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं।"
आगरा के अलावा हाथरस, अलीगढ़ और मथुरा में चलाए जाने वाले नियमित क्रिकेट अकादमियां भी इन दिनों कैंप चला रही हैं। क्रिकेट लेखक प्रमोद कादिर बताते हैं कि इन कैंपों में हिस्सा लेने वाले बच्चों का क्रिकेट ज्ञान हैरान कर देना वाला है। साथ ही क्रिकेट के प्रति उनकी दीवानगी देखने लायक है।
इस क्षेत्र को अच्छी तरह जानने वाले शिक्षाविद् वी.पी. सिंह कहते हैं कि इन दिनों क्रिकेट का बुखार सब ओर है। बकौल सिंह, "कौन जाने इन्हीं बच्चों मे से कोई सचिन तेंदुलकर या फिर कोई मुनाफ पटेल निकलकर सामने आ जाए। एक बात साफ हो गया है, लोग मानने लगे हैं कि क्रिकेट के माध्यम से तेजी से धन कमाया जा सकता है।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।