इसके अलावा बीसीसीआई ने सपोर्ट स्टाफ के 11 सदस्यों को भी 'जीवनदान' दिया है जो मुख्य धारा से कटकर बागी लीग के साथ जुड़े गए थे। बीसीसीआई की कार्यकारिणी ने अप्रैल में हुई बैठक के बाद बागियों को मुख्य धारा में लौटने का प्रस्ताव दिया था।
जीवनदान पाने वाले मौजूदा खिलाड़ियों में हेमांग बदानी, रोहन गावस्कर, रतिंदर सिंह सोढ़ी, अंबाती रायडू, दिनेश मोंगिया और दीप दासगुप्ता के नाम प्रमुख हैं।
बीसीसीआई से जीवनदान पाने वाले पूर्व क्रिकेटरों में बागी लीग में अधिकारियों और कोच की भूमिका निभा रहे संदीप पाटिल, राजेश कामत, करसन घावरी, प्रणव रॉय, अशोक मल्होत्रा, राजेश चौहान, बलविंदर सिंह संधू, भरत रेड्डी, अतुल वासन, इरापल्ली प्रसन्ना, अजीत वाडेकर और मदनलाल शामिल हैं।
इन सभी खिलाड़ियों और अधिकारियों ने आईसीएल के साथ करार खत्म कर बीसीसीआई से घरेलू तथा अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में वापसी की इजाजत मांगी थी। इस संबंध में विचार-विमर्श के बाद बीसीसीआई ने इन्हें इसकी इजाजत दे दी है।
बीसीसीआई ने हालांकि आईसीएल के अध्यक्ष और भारतीय टीम के पूर्व कप्तान कपिल देव तथा बीसीसीआई की चयन समिति के अध्यक्ष रहे पूर्व विकेटकीपर किरण मोरे को इस संबंध में किसी प्रकार की राहत नहीं दी है क्योंकि इन दोनों ने आईसीएल के साथ अपना करार खत्म नहीं किया है।
बीसीसीआई सचिव एन. श्रीनिवासन ने कहा, "हमने इन खिलाड़ियों और अधिकारियों का अनुरोध स्वीकार कर लिया है। इस संबंध में खिलाड़ियों और अधिकारियों के संबंधित राज्यों के क्रिकेट संघों को जानकारी दे दी गई है। सभी 79 खिलाड़ी इसी सत्र से घरेलू क्रिकेट खेल सकते हैं।"
बीसीसीआई ने साफ किया है कि एक साल के अंतराल के बाद ये खिलाड़ी राष्ट्रीय टीम में शामिल होने की योग्यता हासिल कर लेंगे। साथ ही कुछ समय बाद ये इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) में भी खेलने के हकदार हो जाएंगे।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।