नई दिल्ली, 3 जून (आईएएनएस)। ट्वेंटी-20 विश्व कप के दूसरे संस्करण का पहला मुकाबला शुक्रवार को ऐतिहासिक लॉर्ड्स मैदान पर मेजबान इंग्लैंड और हॉलैंड के बीच खेला जाना है।
कद और प्रतिष्ठा के लिहाज से इंग्लैंड और हॉलैंड टीमों के बीच किसी प्रकार की तुलना की संभावना नहीं बनती लेकिन कुछ खिलाड़ी ऐसे हैं, जिनकी बदौलत हॉलैंड, पॉल कोलिंगवुड की कप्तानी में पहली बार किसी विश्व कप में खेल रहे शक्तिशाली इंग्लैंड को पटखनी देने के बारे में सोच सकता है।
इस क्रम में सबसे पहला नाम तेज गेंदबाज डिर्क नैन्स का है, जो पहली बार किसी अंतर्राष्ट्रीय मुकाबले में अपने देश का प्रतिनिधित्व करेंगे। नैन्स आस्ट्रेलिया के विक्टोरिया प्रांत के लिए खेलते रहे हैं। वहीं से ख्याति अर्जित कर उन्होंने पिछले महीने दक्षिण अफ्रीका में आयोजित इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) के दूसरे संस्करण के लिए दिल्ली डेयर डेविल्स टीम में जगह बनाई।
नैन्स ने आईपीएल में ऐसी चमक बिखेरी कि आखिरकार हॉलैंड क्रिकेट बोर्ड को उन्हें अपनी राष्ट्रीय टीम में शामिल करना ही पड़ा। नैन्स के माता-पिता हॉलैंड के निवासी रहे हैं।
आज वह आस्ट्रेलिया में बस चुके हैं लेकिन नैन्स के पास हॉलैंड का भी पासपोर्ट है। भारतीय उपकप्तान वीरेंद्र सहवाग ने नैन्स को विश्व के तीव्रतम गेंदबाजो में एक कहा था।
हॉलैंड को बल्लेबाजी में बास ज्यूडिरिंट, डेन वेन बंग, टॉम डी ग्रूथ और एरिक श्वारजिंस्क से काफी उम्मीदें होंगी। बंग अपने अनुभव और विस्फोटक शैली की बदौलत इंग्लैंड के गेंदबाजों के लिए परेशानी का सबब बन सकते हैं।
नैन्स के अलावा हॉलैंड को गेंदबाजी में एडगर शिफरली, रुं ड निजमन और हरफनमौला मुदस्सर बुखारी से काफी उम्मीद होगी। क्वालीफाईंग मुकाबले में निजमन और शिफरली ने केन्या के खिलाफ सात विकेट बटोरे थे।
हॉलैंड ने अब तक चार ट्वेंटी-20 मैच खेले हैं। उसे दो में जीत मिली है जबकि एक बार उसे हार का सामना करना पड़ा है। एक मैच बेनजीता रहा है। हॉलैंड की टीम पहली बार ट्वेंटी-20 विश्व कप में खेल रही है।
दूसरी ओर, क्रिकेट के जनक कहे जाने वाले इंग्लैंड की टीम को अपने घर में चहेते दर्शकों के बीच खेलने का फायदा मिलेगा। इंग्लैंड के पास एक से बढ़कर एक बड़े स्टार खिलाड़ी हैं। इस लिहाज से संभावना जताई जा रही है कि इस मैच के नतीजा बहुत चौंकाने वाला नहीं होगा लेकिन अगर कुछ चुनिंदा खिलाड़ी चमक गए तो हॉलैंड पासा पलट सकता है।
हॉलैंड की टीम जहां अपने पहले अंतर्राष्ट्रीय ट्वेंटी-20 मुकाबले में उतरेगी वहीं इंग्लैंड की टीम ट्वेंटी-20 विश्व कप में अपना छठा मैच खेलेगी। दक्षिण अफ्रीका में खेले गए पहले संस्करण के दौरान इंग्लैंड ने पांच मैच खेले थे। एक में उसकी जीत हुई थी जबकि चार में उसे हार का सामना करना पड़ा था।
वर्ष 2007 में तो इंग्लैंड की टीम सेमीफाइनल में नहीं पहुंच सकी थी। इस बार वह अपने कप्तान, केविन पीटरसन, रवि बोपारा, ओवेस शाह, दमित्रि मास्कारेनहास जैसे धुरंधर बल्लेबाजों तथा स्टुअर्ट ब्रॉड, जेम्स एंडरसन, ग्रीम स्वान, रेयान साइडबॉटम और आदिल राशिद जैसे गेंदबाजों के उम्दा प्रदर्शन के बूते अंतिम चार में पहुंचने का लक्ष्य रखा है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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