नई दिल्ली , 4 जून (आईएएनएस)। दो साल पहले दक्षिण अफ्रीका में ट्वेंटी-20 विश्व कप के पहले संस्करण का खिताब जीतने के साथ भारतीय क्रिकेट टीम ने जिस सफर का आगाज किया था वह आज उस मुकाम पर पहुंच गया है जहां करोड़ों क्रिकेट प्रेमियों की अपेक्षाओं के दबाव के बीच उसे दोबारा चैंपियन बनकर दिखाना होगा।
ट्वेंटी-20 विश्व कप के दूसरे संस्करण के अंतर्गत शनिवार को अपने पहले ग्रुप मुकाबले में स्थानीय ट्रेंट ब्रिट मैदान पर महेंद्र सिंह धौनी की टीम बांग्लादेश के साथ दो-दो हाथ करेगी।
इंग्लैंड पहुंचने के बाद खेले गए अपने पहले अभ्यास मैच में भारत को न्यूजीलैंड के हाथों करारी शिकस्त झेलनी पड़ी थी लेकिन दूसरे मैच में उसने बुधवार को पाकिस्तान को नौ विकेट से हराकर अपने मनोबल को संभाला है।
भारतीय टीम को खिताब का प्रबल दावेदार माना जा रहा है क्योंकि संयोजन के लिहाज से वह सबसे अधिक संतुलित है। बेहतरीन फार्म में चल रहे सलामी बल्लेबाजों की जोड़ी, मध्यक्रम में तूफानी पारी खेलने वाले बल्लेबाजों और रनों के भूखे 'पुछल्लों' के रहते भारत को बड़ा स्कोर खड़ा करने या फिर किसी लक्ष्य का पीछा करने के लिए ज्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ती है।
भारतीय टीम में 'स्मार्ट' गेंदबाजों की एक नई पौध है जो मैदान में गुर्राने और तेज गेंदें फेंकने की जगह बल्लेबाजों पर मनोवैज्ञानिक दृष्टि से हावी होने में यकीन करते हैं। दो बेहतरीन स्पिनरों के रहते भारत को पिच के मिजाज के अनुरूप आक्रमण पंक्ति में विविधता लाने के बारे में चिंता करने की जरूरत नहीं।
इसके अलावा भारतीय टीम के पास एक ऐसा कप्तान है, जो रणनीति गढ़ने में माहिर है। एक कप्तान में यह गुण होना महत्वपूर्ण साबित होता है क्योंकि इन दिनों क्रिकेट को दमखम के बजाए 'माइंड गेम' के तौर पर ज्यादा जाना जाता है।
सबको साथ लेकर चलने वाले एक कप्तान के नेतृत्व में खेलने वाली टीम का हर सदस्य अपनी क्षमता से अधिक देने का प्रयास करता है और भारतीय टीम में इन दिनों यही हो रहा है।
गौैतम गंभीर, वीरेंद्र सहवाग, सुरेश रैना, युवराज सिंह, रोहित शर्मा, यूसुफ पठान, रुद्र प्रताप सिंह, जहीर खान, हरभजन सिंह और खुद कप्तान धौनी जैसे खिलाड़ी जिस टीम में हों, उसे किसी चिंता करने की जरूरत नहीं होनी चाहिए।
हाल के मैचों में इन खिलाड़ियों के अच्छे प्रदर्शन को देखते हुए यही कहा जा सकता है लेकिन भूलना नहीं चाहिए कि क्रिकेट में अप्रत्याशित परिणाम अपवाद नहीं हैं।
भारतीय टीम कागजों पर संतुलित और मैदान में मनोबल से भरपूर दिखती है लेकिन मानसिक और शारीरिक थकान के कारण उसे नुकसान उठाना पड़ सकता है।
भारतीय खिलाड़ियों ने पिछले कुछ समय से राष्ट्रीय, अंतर्राष्ट्रीय और आईपीएल जैसी प्रतियोगिताओं के अंतर्गत लगातार जितना क्रिकेट खेला है, उससे थकावट होना स्वाभाविक है।
ग्रुप मैचों में भारत को बांग्लादेश से सावधान रहना होगा क्योंकि यह टीम कम से कम ट्वेंटी-20 मैचो में किसी भी टीम को पटखनी दे सकती है। बांग्लादेश के बल्लेबाज बड़े स्ट्रोक खेलने में माहिर हैं और ट्वेंटी-20 क्रिकेट कुल मिलाकर इसी का नाम है।
मोहम्मद अशरफुल की टीम में कुछ खिलाड़ी ऐसे हैं, जो विकेट पर टिक सकते हैं और कुछ ऐसे भी हैं जो बहुत कम समय में विपक्षी टीम के आक्रमण की बखिया उधेड़ सकते हैं। 2007 विश्व कप में बांग्लादेश ने अशरफुल और आफताब अहमद की शानदार बल्लेबाजी की बदौलत वेस्टइंडीज को बाहर का रास्ता दिखाया था।
युवा बांग्लादेशी टीम में सकीबुल हसन जैसे खिलाड़ी भी हैं जो 22 साल की उम्र में ही वरिष्ठ खिलाड़ियों की सूची में जगह पा चुके हैं। सकीबुल लंबे समय से जैक्स कालिस तथा एंड्रयू फ्लिंटॉफ जैसे विश्व के सबसे अच्छे हरफनमौला खिलाड़ियों के साथ जगह बनाए हुए हैं।
मशरफे मुर्तजा के नाम से सब वाकिफ हैं। कोलकाता नाइट राइर्ड्स टीम ने उन्हें 6.5 लाख डॉलर में हासिल किया था। यह अलग बात है कि उन्हें सिर्फ एक मैच में मौका मिला। मुर्तजा को आईपीएल में इतनी कीमत इसलिए मिली क्योंकि वह गेंद और बल्ले दोनों के साथ कमाल दिखा सकते हैं। इसके अलावा तमीम इकबाल, मोहम्मदल्ला, नईम इस्लाम और अब्दुर रज्जाक अपनी टीम को जीत दिलाने में अहम भूमिका अदा कर सकते हैं।
हाल के दिनों में ट्वेंटी-20 मैचों में बांग्लादेश का प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा है। उसने छह में से सिर्फ एक मैच जीता है। अपने अंतिम मुकाबले में बांग्लादेश ने दक्षिण अफ्रीका को कड़ी टक्कर दी थी।
ऐसे में भारत को सावधान शुरुआत करनी होगी क्योंकि ट्वेंटी-20 मैचों में एक या दो खिलाड़ियों के चमक के कारण कमजोर टीमें भी जीत हासिल कर सकती हैं और इसमें कोई शक नहीं कि बांग्लादेश के पास कम से कम चार ऐसे खिलाड़ी हैं जो अपने बूते मैच जिता सकते हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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