दक्षिण अफ्रीका में 2007 में पहली बार आयोजित विश्व चैंपियनशिप ने अपने संक्षिप्त स्वरूप और रोचक मुकाबलों के कारण जबरदस्त लोकप्रियता बटोरी थी। इस बार भी अगर यह चैंपियनशिप उसी स्तर तक लोकप्रिय रही तब एक बात साबित हो जाएगा कि ट्वेंटी-20 क्रिकेट लंबे समय तक लोगों का मनोरंजन करेगा और इसे वैश्विक खेल के रूप में विस्तार दिया जा सकेगा।
भारत ने पिछले साल दक्षिण अफ्रीका में आयोजित ट्वेंटी-20 विश्व कप के पहले संस्करण का खिताब जीतकर सबको चौंका दिया था। उसी साल वेस्टइंडीज में 50-50 विश्व कप भी खेला गया था लेकिन ट्वेंटी-20 की तेज गति और संक्षिप्त कार्यक्रम के आगे उसकी चमक बिल्कुल फीकी रही थी।
ट्वेंटी-20 की लोकप्रियता का ग्राफ इतना ऊपर चढ़ चुका है कि अभी से ही सभी मैचों के टिकट बिक चुके हैं। पिछले संस्करण की तरह इस बार भी ट्वेंटी-20 क्रिकेट में चियर-लीडर्स और आतिशबाजी की धूम रहेगी।
लगातार दूसरी बार खिताब जीतने की राह में भारत के लिए दक्षिण अफ्रीका, आस्ट्रेलिया, पाकिस्तान और श्रीलंका की टीमें मुश्किलें खड़ी कर सकती हैं।
भारत को अपने ग्रुप मैच जीतने में मुश्किल नहीं आएगी। भारत को ग्रुप मैचों में बांग्लादेश और आयरलैंड से भिड़ना है। हालांकि सुपर-आठ दौर में उसे काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है क्योंकि हाल ही में संपन्न आईपीएल के माध्यम से कई देशों के प्रमुख खिलाड़ी बेहतरीन फार्म हासिल कर चुके हैं।
भारतीय टीम को खिताब का प्रबल दावेदार माना जा रहा है क्योंकि संयोजन के लिहाज से वह सबसे अधिक संतुलित है। बेहतरीन फार्म में चल रहे सलामी बल्लेबाजों की जोड़ी, मध्यक्रम में तूफानी पारी खेलने वाले बल्लेबाजों और रनों के भूखे 'पुछल्लों' के रहते भारत को बड़ा स्कोर खड़ा करने या फिर किसी लक्ष्य का पीछा करने के लिए ज्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ती है।
भारतीय टीम में 'स्मार्ट' गेंदबाजों की एक नई पौध है जो मैदान में गुर्राने और तेज गेंदें फेंकने की जगह बल्लेबाजों पर मनोवैज्ञानिक दृष्टि से हावी होने में यकीन करते हैं। दो बेहतरीन स्पिनरों के रहते भारत को पिच के मिजाज के अनुरूप आक्रमण पंक्ति में विविधता लाने के बारे में चिंता करने की जरूरत नहीं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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