चंद्रशेखर मानते हैं कि धौनी ने बिना सोची-समझी रणनीति के तहत दोनों फैसले किए। ओझा के स्थान पर जडेजा को आजमाने का कोई तुक नहीं था क्योंकि ओझा पहले दो मैचों में खेल चुके थे और उनका प्रदर्शन भी अच्छा रहा था।
बकौल चंद्रशेखर, "जडेजा अच्छे खिलाड़ी हैं लेकिन उन्होंने इंग्लैंड पहुंचने के बाद एक भी मैच नहीं खेला था। ऐसे में एक अहम मुकाबले में उन्हें उतारना ठीक नहीं था। मेरे लिहाज से ओझा को टीम में रखना चाहिए था लेकिन बल्लेबाजी मजबूत करने की कप्तान की चाह ने सारा काम खराब कर दिया।"
चंद्रशेखर मानते हैं कि भारतीय टीम युवराज सिंह पर जरूरत से ज्यादा आश्रित हो गई थी। बकौल चंद्रशेखर, "सुरेश रैना, गौतम गंभीर, धौनी, यूसुफ पठान और रोहित शर्मा जैसे अच्छे बल्लेबाजों के रहते हुए भारतीय टीम युवराज पर कुछ ज्यादा ही आश्रित दिख रही थी। अगर युवराज ने पिछले मैचों में अच्छा प्रदर्शन नहीं किया होता तो भारत पहले ही बाहर हो गया होता।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।