लंदन, 15 जून (आईएएनएस)। ऐतिहासिक लॉर्ड्स क्रिकेट मैदान पर रविवार को भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान महेंद्र सिंह धौनी की जिद के आगे करोड़ों भारतीयों का सपना चकनाचूर हो गया। भारतीयों ने अपनी टीम द्वारा जोहांसबर्ग के इतिहास को दोबारा रचकर ट्वेंटी-20 क्रिकेट की दुनिया पर बादशाहत बरकरार रखने का सपना पाला था लेकिन एकता की दुहाई देने वाले कप्तान के गलत फैसलों के कारण भारत को हार का सामना करना पड़ा।
अंग्रेज खिलाड़ियों ने अपने जुझारू खेल से इस सपने को न सिर्फ सपना ही रहने दिया बल्कि भारत को असमय ही विश्व कप से बाहर कर दिया। धौनी के धुरंधरों से सभी को भारी उम्मीदें थीं लेकिन शायद इन उम्मीदों में इतना वजन हो गया था कि भारतीय शूरमा इसको सहन न कर पाए। कागज पर बेहद ही मजबूत दिखने वाला भारत का बल्लेबाजी क्रम लॉर्ड्स में बाउंसर के सामने नतमस्तक नजर आया। हर भारतीय बल्लेबाज विपक्षियों पर नहीं बल्कि मानो खुद के चेहरे पर चिंता की लकीरें खींच रहा था।
सुपर-8 मुकाबले के इस मैच में मेजबान इंग्लैंड के हाथों मिली हार अप्रत्याशित तो नहीं थी लेकिन उम्मीदों के उलट जरूर थी। इंग्लैंड ने निवर्तमान ट्वेंटी-20 विश्व चैंपियन भारत को तीन रनों से हरा दिया। भारत को जीत के लिए 154 रन बनाने का लक्ष्य मिला था लेकिन वह यहां तक पहुंचने में असफल रहा।
भारत का कोई भी बल्लेबाज पूरी लय में नहीं दिखा। भारतीय टीम निर्धारित 20 ओवरों में पांच विकेट के नुकसान पर 150 रन ही बना सकी। इससे पहले भारत ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी का फैसला किया। पहले बल्लेबाजी करते हुए इंग्लैंड ने 20 ओवरों में सात विकेट पर 153 रनों का स्कोर खड़ा किया।
इस हार से भारत के क्रिकेट प्रेमियों को होने वाले दर्द का अहसास शायद धौनी को भी है। इसीलिए उन्होंने मैच के बाद भारतीय प्रशंसकों से माफी मांगी। मैच हारने के बाद धौनी ने संवाददाता सम्मेलन में कहा, "जो हुआ हम उसके लिए माफी चाहते हैं लेकिन हम सबने अपना सर्वश्रेष्ठ दिया था। हमारे पास अनुभवी खिलाड़ी थे जो स्थिति को संभाल सकते थे लेकिन आज हमारे पक्ष कुछ भी नहीं रहा।"
भारतीय कप्तान ने कहा, "भारत एक भावुक देश है। हम प्रशंसकों से कहीं ज्यादा दुखी हैं।" उन्होंने इस बात को खारिज कर दिया कि इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) में खेलने की वजह से भारतीय खिलाड़ी थके हुए थे।
टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करने और प्रज्ञान ओझा की जगह रवींद्र जडेजा को अंतिम-11 में शामिल करने के कप्तान धौनी के फैसले की चारों ओर आलोचना हुई। पूर्व क्रिकेटरों ने धौनी के इस फैसले को समझ से परे करार दिया। पूर्व टेस्ट स्पिनर वी.बी. चंद्रशेखर ने कहा कि टॉस जीतने के बाद पहले गेंदबाजी करना और ओझा के स्थान पर जडेजा को टीम में शामिल करना भारतीय टीम की हार का कारण बना।
चंद्रशेखर मानते हैं कि धौनी ने बिना सोची-समझी रणनीति के तहत दोनों फैसले किए। ओझा के स्थान पर जडेजा को आजमाने का कोई तुक नहीं था क्योंकि ओझा पहले दो मैचों में खेल चुके थे और उनका प्रदर्शन भी अच्छा रहा था।
चंद्रशेखर के अलावा पूर्व क्रिकेटर मदनलाल और चेतन चौहान ने भी धौनी के इस फैसले की आलोचना की। चौहान ने कहा, "जडेजा अच्छे खिलाड़ी हैं लेकिन उन्होंने इंग्लैंड पहुंचने के बाद एक भी मैच नहीं खेला था। ऐसे में एक अहम मुकाबले में उन्हें उतारना ठीक नहीं था। मेरे लिहाज से ओझा को टीम में रखना चाहिए था लेकिन बल्लेबाजी मजबूत करने की कप्तान की चाह ने सारा काम खराब कर दिया।"
दूसरी ओर मदनलाल मानते हैं कि भारतीय टीम युवराज सिंह पर जरूरत से ज्यादा आश्रित हो गई थी। बकौल मदनलाल, "सुरेश रैना, गौतम गंभीर, धौनी, यूसुफ पठान और रोहित शर्मा जैसे अच्छे बल्लेबाजों के रहते हुए भारतीय टीम युवराज पर कुछ ज्यादा ही आश्रित दिख रही थी। अगर युवराज ने पिछले मैचों में अच्छा प्रदर्शन नहीं किया होता तो भारत पहले ही बाहर हो गया होता।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।