टॉस जीतने के बाद श्रीलंका ने कप्तान कुमार संगकारा (नाबाद 64) और एंजेलो मैथ्यूज (नाबाद 35) की धारदार बल्लेबाजी की बदौलत निर्धारित 20 ओवरों में छह विकेट खोकर 138 रन बनाए। गौर करने की बात यह है कि श्रीलंका ने मात्र 70 रन के कुल योग पर अपने छह विकेट गंवा दिए थे। जवाब में खेलने उतरी पाकिस्तानी टीम ने कामरान अकमल (37), शाहिद अफरीदी (नाबाद 54) और शोएब मलिक (नाबाद 24) की आतिशी बल्लेबाजी की बदौलत 18.4 ओवरों में दो विकेट खोकर लक्ष्य हासिल कर लिया।
इस तरह पाकिस्तान ने उस मिशन को पूरा कर लिया जो पिछले साल दक्षिण अफ्रीका में आयोजित टूर्नामेंट के पहले संस्करण के फाइनल में भारत के हाथों मिली हार के कारण अधूरा रह गया था। यह जीत जाहिर तौर पर घरेलू हिंसा से त्रस्त करोड़ों पाकिस्तानियों को सुकून पहुंचाएगी। इससे न सिर्फ क्रिकेट जगत में पाकिस्तान की छवि एक बार फिर मजबूत होगी बल्कि इसकी मदद से पाकिस्तान अपने देश में क्रिकेट को फिर से जिंदा कर सकेगा।
यूनुस खान टूर्नामेंट की शुरुआत से ही कहते आ रहे थे कि उनकी टीम के लिए यह खिताब किसी संजीवनी से कम नहीं होगा क्योंकि इसकी मदद से पाकिस्तान में क्रिकेट को 'जिंदा' रखा जा सकेगा। आंतरिक अस्थिरता और पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड में जारी उठापटक से तंगहाल पाकिस्तानी अवाम का अपनी टीम पर से धीरे-धीरे भरोसा उठने लगा था लेकिन यह जीत उस भरोसे रूपी पौधे के लिए आक्सीजन का काम करेगी।
मुकाबला शुरू होने से पहले यह कहा जा रहा था कि श्रीलंका का पलड़ा भारी है। इसके पीछे वजह भी थी। श्रीलंकाई टीम अजेय रहते हुए फाइनल में पहुंची थी जबकि पाकिस्तान दो मैच हारने के बाद यहां पहुंचा था। सेमीफाइनल में दक्षिण अफ्रीका पर मिली अप्रत्याशित जीतने उसे खिताब के प्रबल दावेदारों में शामिल कर दिया था लेकिन आंकड़ों के लिहाज से श्रीलंका का पलड़ा भारी माना जा रहा था।
धुन के पक्के पाकिस्तानी खिलाड़ियों को भला इसकी परवाह कहां थी। टॉस हारने के बाद यूनुस को अफसोस जरूर हुआ लेकिन जब उनके गेंदबाजों ने शुरुआती सफलता दिलाई तब जाकर उन्हें लगा कि उनकी टीम इस मैच को शुरुआत से ही अपने हक में कर सकती है। अब्दुर रज्जाक ने एक के बाद एक तीन विकेट झटककर श्रीलंका की कमर तोड़ दी लेकिन एक छोर पर कुमार संगकारा ने अपनी टीम को सम्मानजनक योग तक पहुंचा दिया। इस प्रयास में एंजेलो मैथ्यूज ने उनका भरपूर साथ दिया।
पाकिस्तान के लिए 139 रनों का लक्ष्य कठिन नहीं था लेकिन श्रीलंकाई आक्रमण पंक्ति का धार को देखते हुए उसे संभली हुई शुरुआत करनी थी। कामरान अकमल और शाहजैब हुसैन ने इस काम को बखूबी निभाया और फिर अफरीदी तथा मलिक ने मिलकर अपनी टीम को गौरवपूर्ण जीत दिला दी। अफरीदी ने टीम के सबसे अनुभवी खिलाड़ी की भूमिका के साथ न्याय करते हुए अपनी टीम के लिए विजयी रन बनाए। इस प्रयास के लिए अफरीदी को 'मैन ऑफ द मैच' चुना गया जबकि श्रीलंका के तिलकरत्ने दिलशान को 'मैन ऑफ द सीरीज' खिताब के नवाजा गया।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।