विश्व विजेता कप्तान के तौर पर नेतृत्व के मौके को दरकिनार करना आसान काम नहीं। एक तरफ जहां पाकिस्तानी टीम में कई सीनियर खिलाड़ियों के बीच कप्तानी को लेकर खींचातानी चलती रही है, वहीं यूनुस ने अपनी टीम के विश्व विजेता बनते ही कप्तानी से इस्तीफा देकर एक शानदार उदाहरण पेश किया है।
यूनुस अच्छी तरह जानते हैं कि वह ट्वेंटी-20 के अंदाज के हिसाब से फिट नहीं बैठते। वैसे तो यूनुस एक अर्से से पाकिस्तानी टीम के कप्तान बनना चाहते थे लेकिन 2007 विश्व कप में टीम की नाकामी के बाद जब इंजमाम ने कप्तानी से इस्तीफा दिया तब पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (पीसीबी) ने यूनुस की दावेदारी और इच्छा को नजरअंदाज कर शोएब मलिक को कप्तान नियुक्त कर दिया था।
यूनुस इससे काफी आहत हुए थे लेकिन उन्होंने हमेशा एक 'टीम-मैन' की तरह खुद को संयम के दायरे में बांधे रखा। यूनुस ने हमेशा पाकिस्तानी क्रिकेट के हित के बारे में सोचा। यही कारण है कि जब अधिकारियों और खिलाड़ियों की शिकायत के बाद मलिक से कप्तानी छीनी तब यूनुस ने न चाहते हुए कप्तानी का बोझ स्वीकार किया।
इसके बाद यूनुस के सामने सबसे बड़ी समस्या टीम में एकता बनाने की थी। मीडिया में खबरें आ रही थीं कि पाकिस्तानी टीम दो धड़ों में बंट गई है लेकिन यूनुस ने इस अटकलों के बेबुनियाद साबित करते हुए टीम में एकता स्थापित की और अपने साथियों के बीच खेलने और जीतने के जज्बे को बनाए रखा।
जब-जब पाकिस्तान को अंतर्राष्ट्रीय बिरादरी से अलग करने की बात चली, यूनुस ने एक सच्चे दूत की तरह अपनी टीम और अपने देश का बचाव किया। यूनुस को अच्छी तरह पता था कि ट्वेंटी-20 विश्व कप खिताब जीतकर उनकी टीम एक साथ कई सवालों का जवाब दे सकती है और यही कारण है कि उन्होंने अपने साथियों से 101 प्रतिशत क्षमता के साथ खेलने की अपील की।
अब जबकि पाकिस्तान ने विश्व खिताब जीत लिया है, यूनुस ने ट्वेंटी-20 क्रिकेट को अलविदा कह दिया है। वह टेस्ट तथा एकदिवसीय मैचों में टीम का नेतृत्व करते रहेंगे। यूनुस अच्छी तरह जानते हैं कि उनका मिजाज ट्वेंटी-20 के मिजाज से फिट नहीं बैठता, लिहाजा ट्वेंटी-20 टीम के एक ऐसे कप्तान की जरूरत है जो लायक भी हो और इस खेल को बेहतर समझता भी हो।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।