नई दिल्ली, 24 जून (आईएएनएस)। वेस्टइंडीज के साथ चार मैचों की एकदिवसीय श्रृंखला शुक्रवार से शुरू हो रही है। भारतीय क्रिकेट टीम के लिए सबसे पहली चुनौती होगी वेस्ट इंडीज में अपने लचर प्रदर्शन जुड़ी कड़वी यादों से छुटकारा पाना।
वैसे हाल ही में हुए ट्वेंटी-20 विश्व कप मुकाबलों में इंग्लैंड में वेस्ट इंडीज के हाथों भारतीय क्रिकेट टीम को करारी हार का सामना करना पड़ा था। जून 2009 में इंग्लैंड में संपन्न ट्वेंटी-20 विश्व कप में भारत सुपर-8 दौर से ही बाहर हो गया था जबकि उसने 2007 में दक्षिण अफ्रीका में इस खिताब पर कब्जा किया था। वेस्ट इंडीज के हाथाों हुई हार ने भारत के टूर्नामेंट से बाहर होने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
इससे पहले 2007 में ही वेस्टइंडीज में खेले गए एकदिवसीय विश्व कप में भारतीय टीम दूसरे दौर में भी नहीं पहुंच सकी थी। वेस्टइंडीज ने 2006 में खेली गई पांच मैचों की एकदिवसीय श्रृंखला में उसे घरेलू मैदानों पर 4-1 से पराजित किया था।
वेस्टइंडीज की धरती भारत के लिए 'भाग्यशाली' नहीं रही है क्योंकि यहां जीत हासिल करने के लिए उसे जबरदस्त संघर्ष करना पड़ा है। भारतीय टीम ने 1982-83 में पहली बार वेस्टइंडीज का दौरा किया था। उस श्रृंखला में वेस्टइंडीज 2-1 से विजयी रहा था।
उसके बाद लगभग 19 वर्षो तक भारत को कैरेबियाई धरती पर जीत नहीं नसीब हुई थी। हार के क्रम को तोड़ते हुए भारतीय खिलाड़ियों ने 2001-02 में पांच मैचों की श्रृंखला में 2-1 के अंतर से जीत हासिल की थी।
1982 के बाद भारत ने 1988 में वेस्टइंडीज दौरा किया था लेकिन इस बार भी उसे पांच मैचों की श्रृंखला में 0-5 के हार का सामना करना पड़ा था। 1996-97 में भारतीय टीम एक बार फिर वेस्टइंडीज गई लेकिन इस बार उसे 1-3 से हार मिली थी।
भारतीय टीम के लिए अच्छी खबर यह है कि हाल के दिनों में अपने घर में कैरेबियाई टीम का प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा है। 2006 सत्र में भारत से भिड़ने के बाद वेस्टइंडीज की टीम ने अपने घर में दो एकदिवसीय श्रृंखलाएं खेली हैं और दोनों में ही उसे हार का सामना करना पड़ा है। 2008 में आस्ट्रेलिया ने उसे 5-0 से रौंदा था जबकि 2008-09 में इंग्लैंड ने उसे 3-2 से पराजित किया था।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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