बीमार है भारतीय फुटबॉल: रोजर मिल्ला
ज्यूरिख। पिछली सदी का सर्वश्रेष्ठ अफ्रीकी फुटबॉलर करार दिए गए रोजर मिल्ला भारत में फुटबॉल की दुर्दशा के लिए "विश्वास एवं संसाधन की कमी" को प्रमुख कारण मानते हैं।
यहां कोका-कोला द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित फीफा वर्ल्ड कप ट्रॉफी टूर के मौके पर बातचीत में इस मशहूर फुटबॉलर ने कहा कि भारत में फुटबॉल की दशा सुधारने के लिए भारतीय क्लबों को विदेश फुटबॉल प्रतिभाओं की मदद लेनी होगी। उन्होंने कहा कि यह वाकई अफसोस की बात है कि एक अरब से अधिक की आबादी वाले भारत में सधे हुए फुटबॉलरों की बड़ी जमात तैयार नहीं हो रही।
विदेशी फुटबॉलरों की मदद की जरूरत
उन्होंने कहा, "अगर भारत वाकई इस खेल की दशा सुधारना चाहता है तो इसके लिए विदेशी फुटबॉलरों की मदद लेनी होगी। मैं समझता हूं कि भारत इस खेल पर उतना संसाधन खर्च नहीं कर रहा है जितना क्रिकेट पर।" उनका मानना है कि भारत जैसे विशाल देश में 20-25 श्रेष्ठ फुटबॉलर पैदाकर अंतर्राष्ट्रीय स्तर की टीम तैयार करना संभव है, पर इसके लिए खास रणनीति एवं समर्पण की जरूरत पड़ेगी।
वह कहते हैं, "सबसे पहली शर्त यह है कि आपको इस खेल में पूरा भरोसा जगाना होगा। भारत क्रिकेट को लेकर जितना उत्साहित है, उतना फुटबॉल को लेकर नहीं।" कैमरून के इस खिलाड़ी को 1990 के विश्व कप में अपने देश को क्वोर्टर फाइनल में पहुंचाने का श्रेय जाता है।
यह पूछे जाने पर कि क्या वे भारतीय युवाओं को प्रशिक्षण देना पसंद करेंगे, उन्होंने कहा कि मौजूदा जिम्मेवारियों में उलझे होने के कारण इसके लिए वक्त निकालना फिलहाल संभव नहीं होगा, पर वह समय-समय पर परामर्शदाता की भूमिका निभाने को तैयार हैं। वे वर्षो पहले एक प्रदर्शन मैच के सिलसिले में कोलकाता की अपनी यात्रा का जिक्र किए बगैर नहीं रहते। वह कहते हैं, "1990 के विश्व कप के बाद मैं कोलकाता गया था। वहां एक मैच खेलने का अनुभव दिलचस्प रहा।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
यहां कोका-कोला द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित फीफा वर्ल्ड कप ट्रॉफी टूर के मौके पर बातचीत में इस मशहूर फुटबॉलर ने कहा कि भारत में फुटबॉल की दशा सुधारने के लिए भारतीय क्लबों को विदेश फुटबॉल प्रतिभाओं की मदद लेनी होगी। उन्होंने कहा कि यह वाकई अफसोस की बात है कि एक अरब से अधिक की आबादी वाले भारत में सधे हुए फुटबॉलरों की बड़ी जमात तैयार नहीं हो रही।
विदेशी फुटबॉलरों की मदद की जरूरत
उन्होंने कहा, "अगर भारत वाकई इस खेल की दशा सुधारना चाहता है तो इसके लिए विदेशी फुटबॉलरों की मदद लेनी होगी। मैं समझता हूं कि भारत इस खेल पर उतना संसाधन खर्च नहीं कर रहा है जितना क्रिकेट पर।" उनका मानना है कि भारत जैसे विशाल देश में 20-25 श्रेष्ठ फुटबॉलर पैदाकर अंतर्राष्ट्रीय स्तर की टीम तैयार करना संभव है, पर इसके लिए खास रणनीति एवं समर्पण की जरूरत पड़ेगी।
वह कहते हैं, "सबसे पहली शर्त यह है कि आपको इस खेल में पूरा भरोसा जगाना होगा। भारत क्रिकेट को लेकर जितना उत्साहित है, उतना फुटबॉल को लेकर नहीं।" कैमरून के इस खिलाड़ी को 1990 के विश्व कप में अपने देश को क्वोर्टर फाइनल में पहुंचाने का श्रेय जाता है।
यह पूछे जाने पर कि क्या वे भारतीय युवाओं को प्रशिक्षण देना पसंद करेंगे, उन्होंने कहा कि मौजूदा जिम्मेवारियों में उलझे होने के कारण इसके लिए वक्त निकालना फिलहाल संभव नहीं होगा, पर वह समय-समय पर परामर्शदाता की भूमिका निभाने को तैयार हैं। वे वर्षो पहले एक प्रदर्शन मैच के सिलसिले में कोलकाता की अपनी यात्रा का जिक्र किए बगैर नहीं रहते। वह कहते हैं, "1990 के विश्व कप के बाद मैं कोलकाता गया था। वहां एक मैच खेलने का अनुभव दिलचस्प रहा।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
Story first published: Tuesday, November 14, 2017, 12:24 [IST]
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