पाक क्रिकेट राजनीति के शिकार हुए यूनुस !
नई दिल्ली, 12 नवंबर (आईएएनएस)। अपने साथियों के व्यवहार से तंग आकर क्रिकेट से कुछ समय के लिए 'ब्रेक' लेने वाले पाकिस्तानी क्रिकेट टीम के वरिष्ठ खिलाड़ी यूनुस खान का एक कप्तान के तौर पर टीम पर कोई नियंत्रण नहीं रह गया था। इसी के चलते यूनुस ने यह फैसला किया।
यूनुस के इस फैसले के बाद पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने बिना देर किए न्यूजीलैंड के साथ खेली जाने वाली तीन मैचों की टेस्ट श्रृंखला के लिए मोहम्मद यूसुफ को कप्तान नियुक्त कर दिया।
यूनुस ने बुधवार को 'क्रिक इंफो डॉट कॉम' से विशेष बातचीत के दौरान कहा था, "मैंने पीसीबी अध्यक्ष एजाज बट्ट से मुलाकात कर आराम पर जाने की इजाजत मांगी। मैंने उनसे कहा कि अब टीम पर मेरा कोई नियंत्रण नहीं रह गया है और अगर किसी कप्तान का टीम पर नियंत्रण नहीं रह जाता है, तब उसका अपने पद पर बने रहने का कोई हक नहीं।"
यूनुस के मुताबिक पिछले चार-पांच महीने उनके लिए हर लिहाज से बेहद चुनौतीपूर्ण रहे हैं और बुरे वक्त से उबरने के लिए उन्हें एकांतवास की जरूरत है। बकौल यूनुस, " मैदान के अंदर और मैदान के बाहर पिछले चार-पांच महीने मेरे लिए बेहद खराब रहे हैं। इस दौरान मैंने व्यक्तिगत और पेशेवर स्तर पर काफी कुछ खोया है। बिखरी चीजों को समेटने में मुझे वक्त लगेगा और इसी को ध्यान में रखकर मैंने ब्रेक लेने का फैसला किया है।"
ऐसा माना जा रहा है कि इस वर्ष सितंबर में दक्षिण अफ्रीका में खेली गई चैम्पियंस ट्रॉफी के बाद से टीम के कम से कम आठ खिलाड़ी यूनुस की कप्तानी और उनके व्यवहार से खिन्न थे। खिलाड़ियों ने इसे लेकर बट्ट के सामने अपना विरोध जता दिया था। इस बीच यूनुस पर मैच फिक्सिंग का आरोप लगा। हालांकि पीसीबी ने इन आरोपों को दरकिनार कर दिया लेकिन इससे यूनुस को भावनात्मक और मानसिक तौर पर काफी क्षति पहुंची।
इससे तंग आकर यूनुस ने अक्टूबर में कप्तानी से त्यागपत्र दे दिया था लेकिन काफी सोच-विचार के बाद पीसीबी ने उनका इस्तीफा नामंजूर कर उन्हें 2011 विश्व कप तक के लिए कप्तानी सौंप दी। साथ ही पीसीबी ने उन्हें कुछ विशेष अधिकार भी सौंपे। दरअसल, यूनुस ने इसी शर्त पर कप्तानी दोबारा स्वीकार की थी कि उन्हें ठहराव और विशेषाधिकार दिए जाएं।
इसके बाद पाकिस्तानी टीम न्यूजीलैंड के साथ एकदिवसीय श्रृंखला में हिस्सा लेने संयुक्त अरब अमीरात गई, जहां उसे 2-1 से हार झेलनी पड़ी। तीन मैचों की तीन पारियों में यूनुस मात्र 26 रन बना सके। इस तरह चैम्पियंस ट्रॉफी से जारी उनके बल्ले की खामोशी ने उन्हें और परेशान कर दिया।
इस बीच उनके साथियों के बीच नेतृत्व और काफी हद तक उनके व्यवहार को लेकर असंतोष बढ़ता गया और अंत में यूनुस ने इन सबसे उबकर आराम पर जाने का फैसला किया। क्रिकेट को जानने और समझने वाले लोग अच्छी तरह जानते हैं कि लंबे समय से उथल-पुथल से गुजर रहे पाकिस्तानी क्रिकेट में इस तरह के 'आराम' को सीधे तौर पर पद से हटाए जाने के तौर पर लिया जाता है।
पीसीबी के इस फैसले के पीछे पाकिस्तानी संसद की खेलों से जुड़ी स्थाई समिति का दखल भी शामिल हो सकता है क्योंकि चैम्पियंस ट्रॉफी के सेमीफाइनल में न्यूजीलैंड के हाथों मिली हार के बाद इस समिति के अध्यक्ष ने यूनुस और कोच इंतिखाब आलम पर मैच फिक्सिंग के संगीन आरोप लगाए थे। इसे लेकर यूनुस, आलम और यहां तक की बट्ट को भी समिति के सामने हाजिरी देनी पड़ी थी।
इस समिति ने बाद में हालांकि यूनुस और आलम को मैच फिक्सिंग के आरोपों से बरी कर दिया था लेकिन यूनुस इससे काफी आहत हुए थे। इस घटना के बाद समिति ने यूनुस और खासकर पीसीबी अध्यक्ष बट्ट के कार्याकलाप पर पैनी नजर रखनी शुरू कर दी थी। बट्ट द्वारा यूनुस को विशेषाधिकार देने के मामले में समिति का दखल था या नहीं, यह साफ नहीं हो सका है लेकिन टीम के वरिष्ठ सदस्यों द्वारा यूनुस के खिलाफ आवाज उठाए जाने से समिति के कान एक बार फिर खड़े हो गए।
यह समिति सीधे तौर पर पाकिस्तानी राष्ट्रपति के प्रति जवाबदेह होती है, जो पीसीबी के 'पैट्रन इन चीफ' हैं। पाकिस्तानी राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने चैम्पियंस ट्रॉफी और उससे भी पहले ट्वेंटी-20 विश्व कप से पहले बट्ट को निशाने पर लिया था। ऐसा कहा जा रहा था कि जरदारी बट्ट के काम से नाखुश हैं और उन्हें हटाए जाने की तैयारी की जा चुकी है। इसी से तंग आकर बट्ट ने टीम पर अच्छा प्रदर्शन करने का दबाव बनाया और साथियों को खुश करने में नाकाम रहे शोएब मलिक को कप्तानी से हटाकर यूनुस को यह जिम्मेदारी सौंपी।
कहते हैं-दुनिया गोल है। यह कहावत पाकिस्तानी क्रिकेट और खासकर पीसीबी के रवैये और उसकी मजबूरियों पर बहुत अच्छी तरह चरितार्थ होती है। अपनी साख बचाने के लिए बट्ट ने मलिक की कुर्सी छीनी थी, फिर अपनी साख बचाने के लिए उन्होंने यूनुस को मैच फिक्सिंग के आरोपों से बरी किया और फिर जब दबाव बढ़ा तो अपनी साख बचाने के लिए उन्होंने यूनुस को ही बलि का बकरा बना दिया।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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