रोमांचित करता है सचिन का बेमिसाल सफर
नई दिल्ली, 14 नवंबर (आईएएनएस)। सज्जनों के खेल का शहंशाह बनना आसान नहीं होता, लेकिन मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर के सामने क्रिकेट का हर शिखर अब मामूली सा नजर आता है। यह सब 20 वर्षो के उस बेमिसाल सफर की बदौलत मुमकिन हुआ जिसके अतीत में झांककर हर क्रिकेट प्रेमी को रोमांच और मधुरता का सुखद अहसास होता है।
तेंदुलकर का अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण 15 नवंबर, 1989 को पड़ोसी मुल्क पाकिस्तानी की सरजमीं पर हुआ था। पाकिस्तान से शुरू हुआ यह सफर आज भी उसी रफ्तार और जुनून के साथ बदस्तूर जारी है। यह बात जरूर है कि इन 20 वर्षो में कई मौके जरूर ऐसे आए जब कुछ लोगों को लगा कि यह महानतम सफर अब थम सकता है, परंतु भारतीय क्रिकेट के इस महान खिलाड़ी ने ऐसी हर सुगबुगाहट को बेमानी करार दिया।
वैसे अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में 30,000 के करीब रन बनाने वाले सचिन के सुनहरे सफर की मजबूत नींव उनकी जन्म स्थली मुंंबई में पहले ही पड़ चुकी थी। 24 अप्रैल, 1973 को जन्मे सचिन के पिता रमेश तेंदुलकर एक उपन्यासकार थे। उन्होंने अपने प्रिय संगीतगार सचिन देवबर्मन के नाम पर ही अपने बेटे का नाम सचिन रखा था। यह नाम संगीत की दुनिया में तो नहीं चमका, लेकिन क्रिकेट की दुनिया में उसकी धुनों पर हर कोई पहले भी थिरका और आज भी थिरक रहा है।
परिवार से मिला सहयोग भी सचिन के इस बेमिसाल सफर की पहली और सबसे मजबूत कड़ी रही। दो बच्चों के पिता सचिन हमेशा कहते रहे कि उनके करियर में बड़े भाई अजीत तेंदुलकर और कोच रमाकांत अचरेकर का बहुत बड़ा योगदान रहा। उल्लेखनीय है कि अजीत ने ही सचिन को क्रिकेट की ओर रुख करने के लिए प्रेरित किया था।
सचिन ने 20 वर्षो के दौरान 159 टेस्ट मैच खेले हैं जिनमें 54.58 की औसत से 12,773 रन बनाए हैं। इनमें 42 शतक शामिल हैं। एकदिवसीय मैचों में भी कोई खिलाड़ी उनके आसपास नहीं फटकता। उन्होंने 436 एकदिवसीय मैचों में 44.50 की औसत से 17,178 रन बनाए हैं, जिनमें 45 शतक शामिल हैं। इन आंकड़ों से साफ है कि उनका यह सफर किस कदर शानदार रहा है।
भारतीय क्रिकेट में भगवान का तमगा पा चुके सचिन का हर कोई मुरीद है। क्रिकेट इतिहास का सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाज कहे जाने वाले सर डॉन ब्रेडमैन ने मास्टर ब्लास्टर में अपनी झलक देखी थी। उन्हीं के हम वतन शेन वार्न की नजरों में सचिन सबसे बड़े बल्लेबाज हैं। पाकिस्तानी क्रिकेट टीम के पूर्व बल्लेबाज जावेद मियांदाद का कहना है कि सचिन का खूबसूरत पहलू यह है कि वह सीखने में कभी संकोच नहीं करते। श्रीलंकाई क्रिकेट टीम के कप्तान कुमार संगकारा ने भी सचिन को आज के युग का सबसे बड़ा क्रिकेट सितारा बताया।
चौरतरफा प्रशंसा के बावजूद सचिन ने हमेशा सहजता और शालीनता को अपने से बांधे रखा। यही बात उनकी महानता में चार चांद लगाती है। वह अपनी हर तारीफ को बड़ी ही सहजता से मुस्कराते हुए स्वीकार करते हैं और अपनी हर आलोचना से सीखने की कोशिश में रहते हैं। एक साक्षात्कार में महानायक अमिताभ बच्चन ने कहा है कि वह सचिन की बल्लेबाजी के अलावा उनकी शालीनता के भी कायल हैं।
आज शायद ही किसी के मन में यह ख्याल उठता हो कि सचिन का सफर कब तक जारी रहेगा। उनके हर चाहने वाले की यही मुराद होगी कि दाएं हाथ यह जादुई बल्लेबाज उनके नजरों के सामने अभी और कई वर्षो तक चौकों व छक्कों की रिमझिम बरसात करता रहे। ऐसी ही एक बरसात पिछले दिनों हैदराबाद के राजीव गांधी अंतर्राष्ट्रीय स्टेडियम में देखने को मिली थी। सचिन की उस 175 रनों की अविस्मरणीय पारी को हर किसी ने शिद्दत से सलाम किया। खुद सचिन ने भी माना था कि यह उनकी बेतरीन पारियों में से एक थी।
अपने करियर में सचिन ने कई ऐसी पारियां खेलीं जो क्रिकेट इतिहास के पन्नों में हमेशा के लिए स्वर्ण अक्षरों में दर्ज हो गई। 24 अप्रैल, 1998 को शारजाह में आस्ट्रेलिया के खिलाफ खेली गई शतकीय पारी आज भी क्रिकेट की शानदार पारियों में गिनी जाती है। सचिन ने 134 रन बनाकर आस्ट्रेलिया के खिलाफ कोकाकोला कप में भारत को जीत दिलाई थी। वर्ष 2003 के विश्व कप में पाकिस्तान के खिलाफ खेली गई 98 रनों की पारी भी उनकी यादगार पारियों में से एक है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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