आस्ट्रेलिया के हाथों एकदिवसीय श्रृंखला में हार झेलने के बाद महेंद्र सिंह धौनी और उनके साथी इस पराजय के गम को भूल यहां खुद को साबित करना चाहेंगे। भारतीय टीम बीते वर्ष श्रीलंका के हाथों मिली हार को भी यहां भूलना चाहेगी।
वैसे भारतीय टीम के लिए अच्छी बात यह है कि तेज गेंदबाज जहीर खान की वापसी हुई है। इससे टीम की कमजोर मानी जा रही गेंदबाजी को जरूर मजबूती मिली है। जहीर के अलावा एस. श्रीशांत की वापसी भी भारतीय टीम की तेज गेंदबाजी में नई जान फूंक सकती है। स्पिन गेंदबाजी की कमान यहां भी हरभजन के हाथों में होगी।
भारतीय टीम का मजबूत पहलू यहां भी उसकी बल्लेबाजी है। सलामी जोड़ी के रूप में वीरेंद्र सहवाग और गौतम गंभीर टीम को शानदार शुरुआत देने की क्षमता रखते हैं। मध्यक्रम में सचिन तेंदुलकर, राहुल द्रविड़ और वी.वी.एस. लक्ष्मण लंबी पारियां खेलेन में माहिर हैं और किसी भी गेंदबाजी आक्रमण से निपटने में भी सक्षम। कप्तान धौनी की मौजूदगी भी टीम की बल्लेबाजी को सुदृढ़ बनाती है। क्रिकेट जगत में 20 वर्ष पूरा कर चुके तेंदुलकर के लिए भी यह मैच अहम रहेगा।
श्रीलंकाई टीम भी खेल हर क्षेत्र में बेहतरीन नजर आती है। टीम की गेंदबाजी उसकी सबसे बड़ा हथियार है। श्रीलंकाई टीम में मुथैया मुरलीधरन और अजंथा मेंडिस की स्पिन जोड़ी भारतीय बल्लेबाजों के लिए परेशानी खड़ी कर सकती है। इस जोड़ी ने पिछले वर्ष भारत के खिलाफ तीन मैचों की टेस्ट श्रृंखला में 47 विकेट झटके थे। इस बार भी यह जोड़ी भारतीय बल्लेबाजों की कठिन परीक्षा लेने की तैयारी में दिखती है।
मेहमान टीम की बल्लेबाजी भारतीय टीम की तुलना में ज्यादा मजबूत नजर नहीं आती लेकिन कुमार संगकारा, माहेला जयवर्धने और थिलान समरवीरा सरीखे बल्लेबाज किसी भी मैदान पर कमाल कर सकते हैं। श्रीलंकाई टीम यही उम्मीद अपने बल्लेबाजों से यहां भी कर रही होगी।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।