संगकारा और हेराथ पेवेलियन लौटे, जीत करीब
पांचवे दिन संगकारा पर एक बड़ी जिम्मेदारी थी लेकिन वह दबाव को झेल नहीं सके। जहीर खान की गेंद पर वह चकमा खा गए और भारतीय कप्तान महेंद्र सिंह धौनी ने कैच लपककर उन्हें पेवेलियन की राह दिखा दी। उन्होंने बेहतरीन 137 रन बनाए। इसके बाद हेराथ भी तीन रनों के स्कोर पर जहीर का शिकार बन गए। खबर लिखे जाने तक मेहमान टीम ने 286 रन बना चुकी थी। नुवान कुलसेकरा 10 और मुथैया मुरलीधरन दो रन बनाकर नाबाद थे।
इससे पहले चौथे दिन ही श्रीलंका की हार लगभग तय हो गई थी। चौथे दिन मेहमान टीम का कुल स्कोर 29 रन पहुंचा ही था कि हरभजन सिंह ने तिलकरत्ने दिलशान के विकेट के रूप में भारत को पहली सफलता दिला दी। पहली पारी में शानदार 109 रन बनाने वाले दिलशान दूसरी पारी में महज 16 रन ही बना सके।
इसके बाद परानाविताना एस. श्रीसंत की गेंद पर पगबाधा करार दिए गए। उन्होंने 54 रन बनाए। परानाविताना के आउट होने के बाद जहीर खान ने माहेला जयवर्धने और थिलन समरवीरा को पेवेलियन की राह दिखा दी। जयवर्धने 12 रनों पर आउट हुए जबकि समरवीरा खाता भी नहीं खोल सके। चायकाल होने से ठीक पहले एंजेलो मैथ्यूज भी प्रज्ञान ओझा का शिकार बन गए। टीम को मुश्किल से उबारने के लिए प्रसन्ना जयवर्धने ने भरपूर कोशिश की लेकिन वह ज्यादा देर तक अपने कप्तान का साथ नहीं दे सके। वह 32 रनों के निजी स्कोर पर पेवेलियन लौट गए।
खेल के तीसरे दिन भारतीय टीम ने सहवाग के शानदार दोहरे शतक और कप्तान महेंद्र सिंह धौनी के शतक की बदौलत अपनी पहली पारी नौ विकेट पर 726 रन बनाकर घोषित कर दी थी। टेस्ट मैचों किसी पारी में भारत का अब तक यह सर्वाधिक स्कोर है।
भारत की ओर से सहवाग ने 293 रनों की यादगार पारी खेली। धौनी ने 100 रन बनाए। द्रविड़ ने 74, वी.वी.एस. लक्ष्मण ने 62 और सचिन तेंदुलकर ने 53 रनों का योगदान दिया। श्रीलंका ओर से मुथैया मुरलीधरन ने चार और रंगना हेराथ ने तीन विकेट चटकाए। मेहमान टीम की पहली पारी 393 रनों पर सिमट गई थी ।
गौरतलब है कि कानपुर में खेले गए श्रृंखला के दूसरे मैच में पारी और 144 रनों से जीत हासिल कर भारतीय क्रिकेट टीम श्रृंखला में 1-0 से आगे है। अहमदाबाद में खेला गया पहला मैच ड्रा रहा था।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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