सुखविंदर ने ढाका से फोन पर बातचीत के दौरान आईएएनएस से कहा, "हमारी टीम युवा है। इसने हाल के दिनों में बेहतरीन प्रदर्शन किया है। हम जूनियर टीम के साथ दक्षिण एशियाई फुटबाल महासंघ (सैफ) कप में खेले। इस लिहाज से हमारी कामयाबी काबिलेतारीफ है।"
सुखविंदर ने कहा कि उनकी टीम का अगला लक्ष्य अब एशियाई फुटबाल कंफेडरेशन (एएफसी) कप और अगले वर्ष चीन के शहर गुआंगझोउ में आयोजित होना वाले एशियाई खेल है।
बकौल सुखविंदर, "मेरे लिए एशियाई खेल सबसे बड़ी चुनौती है। हमारे खिलाड़ियों में प्रतिभा कूट-कूट कर भरी है और यही कारण है कि मैं एशियाई खेलों में उनसे काफी अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद कर रहा हूं।"
सुखविंदर को 2005 में राष्ट्रीय टीम को प्रशिक्षित करने की जिम्मेदारी दी गई थी लेकिन उसी साल उन्हें बिना कारण बताए हटा दिया गया और फिर इस वर्ष अक्टूबर में अंडर-23 टीम का कोच नियुक्त किया गया।
भारतीय टीम ने रविवार को मालदीव को हराकर सैफ कप फुटबाल खिताब जीता। सुखविंदर इस सफलता से अभिभूत हैं। उनकी निगरानी में भारतीय टीम ने दूसरी बार इस खिताब पर कब्जा किया है। इससे पहले सुखविंदर की देखरेख में भारतीय टीम ने 1999 में गोवा में खिताबी जीत हासिल की थी।
हमेशा से युवाओं के विकास पर जोर देने वाले सुखविंदर ने कहा, "मैंने युवाओं के विकास को लेकर हमेशा गंभीरता बरती है। यही कारण है कि मैंने अंडर-23 टीम को प्रशिक्षित करने का काम स्वीकार किया। मेरे लिए यह एक चुनौतीपूर्ण काम था।"
सुखविंदर 17 वर्षो तक जेसीटी क्लब के कोच रहे थे। उनकी देखरेख में देश को बलदीप सिंह, बलवंत सिंह और जयप्रीत सिंह जैसे प्रतिभाशाली खिलाड़ी मिले। ये सभी खिलाड़ी जेसीटी क्लब के युवा विकास कार्यक्रम का नतीजा थे।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।