आईपीएल-3 की नीलामी को लेकर पाकिस्तान की नाराजगी कितनी जायज (विश्लेषण)
नई दिल्ली, 20 जनवरी (आईएएनएस)। मुंबई में मंगलवार को इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) के तीसरे संस्करण के लिए हुई नीलामी में अपने देश के किसी भी खिलाड़ी के लिए बोली नहीं लगने के कारण पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (पीसीबी) और वहां के खेल मंत्री की नाराजगी कितनी जायज है, यह चर्चा का विषय बना हुआ है। ट्राइडेंट होटल में मंगलवार को हुई नीलामी में मौजूदा ट्वेंटी-20 विश्व चैम्पियन पाकिस्तानी टीम के 11 खिलाड़ियों पर बोली लगनी थी लेकिन आठ में से एक भी फ्रेंचाइजी टीम ने उन्हें अपने साथ जोड़ने की इच्छा नहीं जाहिर की।
दो देशों के बीच की दूरियां मिटाने वाले पुल के तौर पर क्रिकेट के चरित्र को देखते हुए निश्चित तौर पर यह एक दुखदाई पक्ष है लेकिन अगर हम पाकिस्तान के पूर्व कप्तान जहीर अब्बास के एक बयान पर गौर करें तो साफ हो जाएगा कि आखिर पाकिस्तानी खिलाड़ियों और वहां के हुक्मरानों को फ्रेंचाइजी टीमों के इस फैसले को क्यों अपने दिल से नहीं लगाना चाहिए। अब्बास ने कहा है कि पाकिस्तानी खिलाड़ियों को यह नहीं भूलना चाहिए कि आईपीएल एक 'प्राइवेट लीग' है। जहीर का इशारा साफ तौर पर उस बाजार की ओर है, जिसने आईपीएल को सफलता के चरम पर पहुंचाया है।
क्रिकेट हमेशा से भारत और पाकिस्तान के बीच दोस्ती रूपी पुल का काम करता रहा है लेकिन मंगलवार की नीलामी के बाद इस पुल का एक मजबूत आधार गिर गया। 26/11 की घटना के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच क्रिकेट रिश्ते कायम करने के जो प्रयास किए जा रहे थे, उनमें कम से कम पाकिस्तान की ओर से अब थोड़े कम प्रयास होंगे। वैसे मौजूदा हालात पर नजर डालें तो पीसीबी भारतीय क्रिकेट बोर्ड के साथ रिश्ते खराब करने की स्थिति में नहीं है क्योंकि लंबे समय से अपने घर में अंतर्राष्ट्रीय मैच नहीं खेले जाने के कारण उसकी वित्तीय स्थिति बेहद खस्ता हो चुकी है।
गौर करने वाली बात यह है कि मंगलवार की नीलामी उसी ट्राइडेंट होटल में हुई, जो नवंबर 2008 में तथाकथित पाकिस्तानी आतंवादियों के हमले का शिकार हुआ था। इस हमले में कई लोगों की जान गई थी। आठ में से तीन फ्रेंचाइजी टीमों के मालिक मुंबई में रहते हैं और ट्राइडेंट के साथ उनका पुराना और भावनात्मक रिश्ता रहा है। ऐसे में सोचने वाली बात यह है कि उसी ट्राइडेंट होटल में बैठकर पाकिस्तानी खिलाड़ियों के लिए बोली लगाते वक्त क्या अपने देश के प्रति उनकी भावनाओं ने उनके फैसले को प्रभावित नहीं किया होगा।
आईपीएल पर भारत सरकार का सीधे तौर पर कोई नियंत्रण नहीं क्योंकि आईपीएल को बीसीसीआई संचालित करती है और यह एक स्वतंत्र संस्था है। भारत सरकार का आईपीएल द्वारा तैयार बाजार पर भी कोई नियंत्रण नहीं। आईपीएल के आयोजकों के पास आज इतने संसाधन हैं कि वे किसी और देश में इसका सफल आयोजन करा सकते हैं। पिछला संस्करण इसका उदाहरण है, जब सरकार द्वारा सुरक्षा मुहैया कराने को लेकर हाथ खड़े करने के बाद आयोजकों ने इस प्रतियोगिता को उसी रौब के साथ दक्षिण अफ्रीका में कराया, जिस रौब के साथ उन्होंने इसे 2008 में भारत में कराया था।
यह आईपीएल द्वारा तैयार बाजार और उससे होने वाले मुनाफे का ही नतीजा है कि किंग्स इलेवन पंजाब टीम के सहमालिक नेस वाडिया और कभी उनकी प्रेमिका रहीं फिल्म अभिनेत्री व्यक्तिगत मनमुटावों को भुलाकर नीलामी के लिए एक ही टेबल पर बैठी नजर आईं। ऐसे में फ्रेंचाइजी टीमें भारत-पाकिस्तान के रिश्तों के बारे में कम और व्यक्तिगत हितों और मुनाफे के बारे में ज्यादा सोचती नजर आईं, तो इसमें गलत क्या है। यह कोई हैरान करने वाली बात नहीं है क्योंकि चाहें वह वाडिया हों या फिर शाहरुख खान, चाहें वह विजय माल्या हों या फिर मुकेश अंबानी, सबने क्रिकेट के बाजार में दिखने वाले मुनाफे को ध्यान में रखकर ही इन टीमों में अपने करोड़ों रुपये झोंके हैं। अब उनका इतना हक तो बनता ही है कि वे अपने मुनाफे को ध्यान में रखकर खिलाड़ियों के लिए बोली लगाएं।
सभी फ्रेंचाइजी टीमें मुनाफे को ध्यान में रखकर ही खिलाड़ियों के लिए बोली लगाती हैं। साथ में उनका ध्यान इस बात पर भी रहता है कि कौन सा खिलाड़ी उनके लिए पूरे सत्र के दौरान उपलब्ध रहेगा और किस खिलाड़ी के साथ कितनी अंतर्राष्ट्रीय व्यस्तता जुड़ी है। आस्ट्रेलियाई खिलाड़ियों के साथ भी यही हुआ। कुल 11 आस्ट्रेलियाई खिलाड़ी नीलामी के लिए मैदान में थे लेकिन चयन सिर्फ दो का हुआ। इसका कारण यह है कि पिछले दोनों संस्करणों के दौरान आस्ट्रेलिया के कई खिलाड़ी अंतर्राष्ट्रीय व्यस्तता के कारण आईपीएल में खेलने नहीं आ सके और कइयों ने आईपीएल से हाथ भी खींच लिया।
पाकिस्तानी खिलाड़ियों को भी कुछ इसी तरह का नुकसान उठाना पड़ा। इसमें व्यक्तिगत तौर पर उनका कोई दोष नहीं है। दरअसल, फ्रेंचाइजी टीमें ऐसे किसी देश के खिलाड़ियों के लिए बोली लगाने को तैयार ही नहीं दिखीं, जिनके साथ कोई विवाद जुड़ा हो। पाकिस्तानी टीम के साथ कोई विवाद नहीं जुड़ा है लेकिन भारत के साथ पाकिस्तान के खराब कूटनीतिक रिश्तों ने उनका काम खराब किया।
पीसीबी अध्यक्ष एजाज बट्ट फ्रेंचाइजी टीमों की इस 'हरकत' से आहत हैं। बट्ट ने आईपीएल आयोजकों और फ्रेंचाइजी टीमों के मालिकों के इस कदम की आलोचना की है। इस संबंध में उन्होंने आईपीएल कमिश्नर ललित मोदी से बात करने की कोशिश की लेकिन उनके मुताबिक मोदी ने उनके फोन कॉल का जवाब ही नहीं दिया। बट्ट ने कहा कि उन्होंने अपने देश के खेल मंत्री एजाज झाखरानी से अनुरोध किया है कि वह इस संबंध में भारत के खेल मंत्री से बात करें। झाखरानी ने इस संबंध में मंगलवार को ही अपनी नाराजगी जाहिर कर दी थी। झाखरानी ने इस घटना को 'बेहद निराशाजनक' करार दिया और कहा कि यह खेल के लिए अच्छा संकेत नहीं है।
फ्रेंचाइजी टीमों द्वारा पाकिस्तानी खिलाड़ियों में रुचि नहीं दिखाने की मुख्य वजह 26/11 के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच कूटनीतिक स्तर पर जारी खींचतान को माना जा रहा है। इस वजह से पाकिस्तानी खिलाड़ियों के आईपीएल के आगे के संस्करणों में भी खेलने को लेकर प्रश्नचिन्ह लगा हुआ है। वर्ष 2008 में मुंबई पर हुए आतंकी हमलों के बाद पिछले वर्ष दक्षिण अफ्रीका में आयोजित आईपीएल के दूसरे संस्करण में पाकिस्तानी खिलाड़ियों के खेलने पर रोक लगा दी गई थी।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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