नागपुर टेस्ट : पारी की हार से बचाने के लिए साहा और जहीर का संघर्ष जारी (लीड-4)
खबर लिखे जाने तक भारत ने सात विकेट के नुकसान पर 287 रन बना लिए थे। अपना पहला टेस्ट मैच खेल रहे विकेटकीपर बल्लेबाज साहा 84 गेंदों पर चार चौकों की मदद से 24 रन बनाकर नाबाद थे जबकि जहीर ने 15 गेंदों पर तीन चौकों की मदद से 14 रन बनाए थे। पारी की हार बचाने के लिए भारत को अभी भी 38 रनों की दरकार है।
मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर को छोड़कर भारत का कोई और बल्लेबाज दक्षिण अफ्रीकी गेंदबाजों का सामना नहीं कर सका। पारी की हार से बचाने के लिए जारी संघर्ष के बीच तेंदुलकर ने अपना 46वां शतक पूरा किया।
तेंदुलकर ने इस मुकाम तक पहुंचने के लिए 177 गेंदों का सामना करते हुए 13 चौके लगाए लेकिन दो गेंद और खेलने के बाद 100 के व्यक्तिगत योग पर वह पॉल हैरिस को अपना विकेट दे बैठे। इसके बाद महेंद्र सिंह धौनी (25) का भी संघर्ष जवाब दे गया। तेंदुलकर का विकेट 192 और धौनी का विकेट 209 रन के कुल योग पर गिरा।
धौनी के विदा होने के बाद हरभजन सिंह ने 39 गेंदों पर छह चौकों और एक छक्के की मदद से 39 रनों की तेज पारी खेलकर काफी हद तक अपनी टीम की मुश्किल कम करने की कोशिश की लेकिन पार्नेल ने उन्हें पगबाधा आउट कर दिया। भज्जी ने साहा के साथ सातवें विकेट के लिए 50 रन जोड़े। भज्जी का विकेट 259 रन के कुल योग पर गिरा।
भारतीय टीम ने चौथे दिन के पहले सत्र में मुरली विजय (32) और एस. बद्रीनाथ (6) के विकेट गंवाए। मुरली हैरिस का शिकार हुए। मुरली ने 90 गेंदों का सामना करते हुए चार चौके लगाए। मुरली का विकेट 96 रन के कुल योग पर गिरा। 122 रन के कुल योग पर बद्रीनाथ भी पेवेलियन लौट गए।
अपने पहले टेस्ट मैच की पहली पारी में शानदार अर्धशतक लगाने वाले बद्रीनाथ को वायने पार्नेल ने मार्क बाउचर के हाथों कैच कराया।
फालोऑन के बाद खेल रही भारतीय टीम ने तीसरे दिन की समाप्ति तक अपनी दूसरी पारी में दो विकेट के नुकसान पर 66 रन बनाए थे।
तेज गेंदबाज डेल स्टेन (51/7) की शानदार गेंदबाजी की बदौलत दक्षिण अफ्रीका ने भारत की पहली पारी 233 रनों पर समेट दी थी।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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