दिन का खेल खत्म होने तक पहली पारी के आधार पर 347 रनों से पिछड़ रही मेहमान टीम ने बिना कोई विकेट खोए छह रन बना लिए थे। खराब रोशनी के कारण दिन का खेल निर्धारित समय से लगभग 45 मिनट पहले समाप्त कर दिया गया। दूसरे दिन का खेल भी निर्धारित समय से आठ ओवर पहले समाप्त कर दिया गया था।
भारतीय टीम ने तीसरे दिन के तीसरे सत्र में छह विकेट के नुकसान पर 643 रन बनाकर अपनी पहली पारी घोषित कर दी थी। भारत को कुल 347 रनों की बढ़त मिली। दक्षिण अफ्रीका ने अपनी पहली पारी में 296 रन बनाए थे। इस लिहाज से मेहमान टीम अभी भी 341 रन पीछे चल रही है।
इससे पहले, अपना चौथा शतक लगाने वाले कप्तान महेंद्र सिंह धौनी 187 गेंदों पर 12 चौकों और तीन छक्कों की मदद से 132 रन बनाकर नाबाद लौटे जबकि 15वां शतक लगाने वाले कलात्मक बल्लेबाज वी.वी.एस. लक्ष्मण ने 260 गेंदों पर 16 चौकों की सहायता से नाबाद 143 रन बनाए।
दोनों ने सातवें विकेट के लिए 259 रनों की अटूट साझेदारी निभाई। सातवें विकेट के लिए भारत की ओर से यह सबसे बड़ी साझेदारी है। धौनी और लक्ष्मण ने 1984 में रवि शास्त्री और सैयद किरमानी के बीच इंग्लैंड के खिलाफ मुंबई में हुई 235 रनों की साझेदारी को पीछे छोड़ा।
दूसरे दिन का खेल खत्म होने पर भारतीय टीम ने पांच विकेट के नुकसान पर 342 रन बनाए थे। तीसरे दिन लक्ष्मण और नाइटवाचमैन अमित मिश्रा ने पारी को संभलकर आगे बढ़ाया। छठे विकेट के लिए इन दोनों ने 48 रनों की साझेदारी की। तीसरे दिन एकमात्र भारतीय विकेट के रूप में मिश्रा 28 रन बनाकर पेवेलियन लौटे। उन्होंने अपनी 38 गेंदों की तेज पारी के दौरान पांच चौके लगाए।
खेल का दूसरा दिन सचिन तेंदुलकर और वीरेंद्र सहवाग के नाम रहा था। सहवाग ने अपने टेस्ट करियर का 19वां और तेंदुलकर ने अपने करियर का 47वां शतक लगाया था। सहवाग 165 और सचिन तेंदुलकर 106 रन बनाकर आउट हुए थे।
दो मैचों की श्रृंखला में दक्षिण अफ्रीका 1-0 से आगे है। नागपुर में खेले गए पहले मैच में उसने भारत को एक पारी और छह रनों से पराजित किया था। अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट परिषद का टेस्ट टीम का ताज हासिल करने के लिए भारतीय टीम को यह मैच किसी भी हाल में जीतना होगा। नागपुर में मिली हार के कारण सत्र की समाप्ति तक सर्वोच्च वरीय टेस्ट टीम बने रहने के उसके मंसूबे को गहरा धक्का लगा है लेकिन यह मैच जीतकर वह अपनी प्रतिष्ठा को बनाए रख सकती है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।