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आत्ममुग्धता पर आत्ममंथन की बड़ी जीत (विश्लेषण)

नई दिल्ली, 3 मार्च (आईएएनएस)। भारतीय हॉकी टीम को आस्ट्रेलिया के हाथों मंगलवार को 2-5 से करारी शिकस्त मिली। रविवार को पाकिस्तान के खिलाफ मिली जीत से आत्ममुग्ध भारतीय टीम जहां अपने 'असल' रंग में नहीं दिखी वहीं इंग्लैंड के हाथों पहले मैच में मिली हार के बाद आत्ममंथन को मजबूर आस्ट्रेलियाई टीम सही मायने में अपने रंग में दिखी।

इस मैच को लेकर दर्शकों में जितना उत्साह था, उससे कहीं अधिक उत्साह भारतीय खिलाड़ियों में दिख रहा था क्योंकि उन्होंने चिरप्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान पर बड़ी जीत के साथ अपने अभियान का आगाज किया था। परंतु आस्ट्रेलिया ने शुरुआती 10 मिनट में ही उसे इस बात का अहसास करा दिया कि दमखम के लिहाज से वह उससे कोसों पीछे है।

इसमें कोई शक नहीं कि आस्ट्रेलियाई टीम दमखम के लिहाज से विश्व कप में हिस्सा ले रहीं कई अन्य टीमों से काफी बेहतर है। इग्लैंड के खिलाफ रविवार को न जाने क्योंकि उसका चिरपरिचित दमखम कहीं खो सा गया था लेकिन भारत के खिलाफ आस्ट्रेलियाई खिलाड़ी शानदार लय में दिखे। उनकी तेजी देखते ही बन रही थी। इसी का नतीजा है कि पूरे मैच के दौरान उन्होंने भारतीय खिलाड़ियों को अपने पास तक फटकने नहीं दिया।

दूसरी ओर, इस मैच के जरिए भारतीय टीम की कई कमजोरियां सामने आईं। सबसे पहली कमजोरी दमखम की कमी है। आस्ट्रेलियाई खिलाड़ी जहां सिर्फ तीन प्रयास में गेंद को अपने क्षेत्र से भारतीय क्षेत्र में पहुंचा दे रहे थे वहीं फारवर्ड खिलाड़ी शिवेंद्र सिंह की गैर मौजूदगी में भारतीय आक्रमण पंक्ति काफी बिखरी हुई नजर आई।

इसी का नतीजा था कि मध्यांतर की सीटी बजने से नौ सेकेंड पहले तक भारत 0-3 से पिछड़ रहा था। 35वें मिनट में हुए गोल की बदौलत भारतीय टीम ने अपना खाता खोला लेकिन बड़े अंतर से पिछड़ने के कारण मैच उसके हाथ से फिसलता नजर आ रहा था। शुरुआती 10 मिनटों में ही दो गोल दागकर मेहमान टीम ने अपने इरादे जाहिर कर दिए थे और उसके बाद भी उसके आक्रमण का पैनापन कमजोर नहीं हुआ।

भारतीय टीम के मुख्य कोच जोस ब्रासा स्वीकार कर चुके हैं कि दमखम के लिहाज से उनकी टीम आस्ट्रेलिया के सामने कहीं नहीं ठहरती। ऐसे में भारत को अपने अगले मुकाबलों के लिए दमखम पर नहीं बल्कि सटीक रणनीति पर भरोसा करना होगा। आस्ट्रेलिया के खिलाफ कई मौकोंे पर गेंद आस्ट्रेलियाई गोलपोस्ट के करीब नजर आई लेकिन दाईं पंक्ति की कमजोरी के कारण उसे समय से लपकने वाला कोई नहीं दिखा।

इस मैच में भारत की हार का सबसे बड़ी वजह यह रही कि वह आत्ममुग्धता में लीन थी जबकि आस्ट्रेलियाई टीम ने सेमीफाइनल तक का सफर तय करने के लिए किसी भी हाल में इस मैच को जीतने का लक्ष्य बना लिया था। इंग्लैंड के हाथों उसे खराब खेल के कारण नहीं बल्कि इंग्लैंड के अच्छे प्रदर्शन के कारण हार मिली थी। पेनाल्टी कार्नरों को गोल में बदलने में बेशक आस्ट्रेलियाई टीम पीछे रही थी लेकिन मैदानी खेल में उसके दमखम में कोई कमी नहीं थी।

भारत के खिलाफ उसने अपनी गलतियों में सुधार किया और जबरदस्त खेल दिखाया। यह एक उम्दा टीम की पहचान है। जो टीम गलतियों से सीखती है और लगातार जीत हासिल करने के बाद भी अपने पैर जमीन पर बनाए रखती है, जीत का सेहरा उसी के सिर बंधता है। भारतीय टीम ने पहले मैच में अच्छे खेल की बदौलत जीत हासिल की थी लेकिन दूसरे मैच में उसने कहीं न कहीं आस्ट्रेलिया को कमतर आंकने की भूल की। इसका नतीजा हमारे सामने है।

विश्व कप में भारत ने आस्ट्रेलिया पर पिछले 32 वर्षो से कोई जीत नहीं दर्ज की है। उसने अंतिम बार कुकाबुरा टीम को 1978 में हराया था। दोनों टीमों के बीच अब तक सात मैच खेले गए हैं, जिसमें पांच में आस्ट्रेलियाई टीम जीती है जबकि भारत को एक बार जीत मिली है। एक मैच बेनतीजा रहा है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

Story first published: Tuesday, November 14, 2017, 12:32 [IST]
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